नोएडा/बुलंदशहर : उत्तर प्रदेश में एक और “मेगा सिटी” बसाने की तैयारी अब जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है। ‘न्यू नोएडा’ परियोजना को लेकर प्रशासन ने पहले चरण में 37 गांवों की जमीन अधिग्रहित करने की तैयारी तेज कर दी है। यह नया शहर करीब 209 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बसाया जाएगा और इसे आने वाले वर्षों में दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा आधुनिक शहरी विस्तार माना जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों से जमीन “आपसी सहमति” से ली जाएगी। ₹4300 प्रति वर्गमीटर मुआवजा तय किया गया है। साथ में विकसित प्लॉट और अतिरिक्त लाभ भी दिए जाएंगे। लेकिन इसके साथ एक सख्त चेतावनी भी जारी हुई है कि 18 अक्टूबर 2024 के बाद किए गए निर्माण को अवैध माना जाएगा और उसका कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।
पहले चरण में 37 गांवों की जमीन अधिग्रहित होगी
आपको बता दें कि प्राधिकरण ने पहले फेज के लिए 24 गांव बुलंदशहर और 13 गांव गौतमबुद्ध नगर के चयन को अंतिम रूप दे दिया है। किसानों से बातचीत और कागजी प्रक्रिया के लिए 3 तहसीलदार नियुक्त किए जाएंगे। साथ ही पैरीफेरल एक्सप्रेसवे के पास अस्थायी कार्यालय खोला जाएगा।
किसानों को क्या मिलेगा?
गौरतलब है कि प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक किसानों के लिए दो तरह के पैकेज बनाए गए हैं।
किसानों को मिलने वाले फायदे:
₹4300 प्रति वर्गमीटर मुआवजा
अतिरिक्त आर्थिक लाभ
7% विकसित प्लॉट
आपसी सहमति से जमीन अधिग्रहण
अधिकारियों का दावा है कि मुआवजा दर यमुना प्राधिकरण के बराबर रखी गई है ताकि किसानों में असंतोष न हो।
18 अक्टूबर 2024 के बाद निर्माण किया तो नहीं मिलेगा पैसा!
विदित है कि प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि 18 अक्टूबर 2024 के बाद बने निर्माण को अवैध माना जाएगा। इसके लिए सैटेलाइट इमेज का इस्तेमाल होगा। खसरा नंबर के आधार पर जांच होगी। यानी अगर किसी ने बाद में निर्माण करके ज्यादा मुआवजा लेने की कोशिश की, तो वह पकड़ में आ जाएगा।
सैटेलाइट से होगी हर इंच जमीन की निगरानी
न्यू नोएडा के लिए बेहद हाईटेक सर्वे प्लान तैयार किया गया है। हर गांव की अलग सैटेलाइट इमेज बनाई जाएगी। खसरा नंबर आधारित मैपिंग होगी। खाली और निर्मित जमीन की अलग पहचान होगी। जमीन की पैमाइश होगी। साथ ही सड़क, पार्क, स्कूल और इंडस्ट्रियल जोन की योजना बनाई जाएगी। प्रशासन इसे “पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया” बता रहा है।
चार चरणों में बसेगा ‘न्यू नोएडा’
न्यू नोएडा यानी DNGIR को 4 फेज में विकसित किया जाएगा।
विकास योजना:
पहला चरण (2023-2027)
3165 हेक्टेयर विकास
दूसरा चरण (2027-2032)
3798 हेक्टेयर
तीसरा चरण (2032-2037)
5908 हेक्टेयर
चौथा चरण (2037-2041)
8230 हेक्टेयर
सरकार का लक्ष्य इसे हाईटेक इंडस्ट्रियल हब, रेजिडेंशियल स्मार्ट सिटी और लॉजिस्टिक्स व रोजगार केंद्र के रूप में विकसित करना है।
इन गांवों की जमीन पहले ली जाएगी
बुलंदशहर के इन गांवों का सबसे पहले होगा अधिग्रहण
बिरोंडी फौलादपुर, बिरोंडी तेजपुर, चोला, डिमरी आदिलपुर, गोपालपुर, हृदयपुर, जोखाबाद, कैथरा, कनवरा, काडू, किशनुपर, लुहाकर, मुरादाबाद, नगलाबरोधा, नवादा, राजरमपुर, राजपुर खुद्र, सबदलपुर, सलेमपुर कायस्थ, सनवाली, शाहपुर कालन, शेरपुर, सिकरा।
गौतमबुद्ध नगर के इन गांवों की जमीन पहले लेंगे
आनंदपुर, बैरंगपुर, बील अकबरपुर, छायसा, दया नगर, गिरिराजपुर, कोट, मिलक खंडेरा, नगला कामरू, नगला न्यानसुख, नेकरामपुर, फूलपुर और सैंथली।
नया नोएडा क्यों है इतना खास?
सरकार का दावा है कि इस प्रोजेक्ट से दिल्ली-एनसीआर का दबाव कम होगा। नए उद्योग आएंगे। लाखों रोजगार पैदा होंगे और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा। यानी आने वाले वर्षों में यह इलाका “खेती की जमीन से बदलकर हाईटेक स्मार्ट सिटी” में तब्दील हो सकता है।
किसानों में उत्साह भी, चिंता भी
कुछ किसान बेहतर मुआवजे और विकसित प्लॉट को बड़ा मौका मान रहे हैं, जबकि कई लोग अपनी जमीन और गांव की पहचान खत्म होने को लेकर चिंतित हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बातचीत कितनी शांतिपूर्ण रहती है और मुआवजा कितना जल्दी मिलता है। नोएडा देश का अगला मेगा स्मार्ट सिटी मॉडल बनने की ओर अग्रसर है।