यूपी में किसानों के लिये बड़ा बदलाव!: 1 जून से Farmer ID अनिवार्य, एक क्लिक पर खुलेगा पूरी जमीन का रिकॉर्ड, बिना ID न खाद मिलेगी, न हीं...जानें क्या है Farmer ID और क्यों है यह इतना जरूरी?
यूपी में किसानों के लिये बड़ा बदलाव!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में किसानों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब खेती, खरीद और सरकारी योजनाओं का पूरा खेल एक डिजिटल पहचान “फार्मर आईडी” से तय होगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 जून से Farmer ID अनिवार्य होगी। यानी बिना इस आईडी के न खाद मिलेगा न फसल की सरकारी खरीद होगी और न किसी योजना का लाभ मिलेगा।

क्या है Farmer ID और क्यों है इतना जरूरी?

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि यह कोई साधारण कार्ड नहीं, बल्कि किसानों का डिजिटल प्रोफाइल है। इसमें शामिल होगा:

  • किसान का नाम
  • जमीन का पूरा रिकॉर्ड
  • फसल की जानकारी
  • सरकारी लाभ का इतिहास

जैसे ही पोर्टल पर आईडी डालेंगे पूरी जमीन और किसान की जानकारी स्क्रीन पर सामने होगी।

सरकार का बड़ा प्लान; एक पोर्टल, पूरी खेती

सरकार पिछले दो साल से “फार्मर रजिस्ट्री” बना रही है। अब इसे पूरी तरह लागू किया जा रहा है। इसका लक्ष्य पारदर्शिता, फर्जीवाड़े पर रोक और सही किसान को सही लाभ देना है। अभी तक करीब 2 करोड़ किसानों की आईडी बन चुकी है, बाकी के लिए गांव-गांव में शिविर लगाए जा रहे हैं।

31 मई तक आखिरी मौका

आपको बता दें कि सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि 31 मई तक हर किसान अपनी Farmer ID बनवा ले। 1 जून के बाद बिना ID काम नहीं चलेगा। यह निर्देश S. P. Goyal ने सभी विभागों को जारी किए हैं।

MSP और खाद खरीद भी ID से जुड़ी

आपको बता दें कि अब सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बिक्री, खाद की खरीद सब कुछ Farmer ID के जरिए होगा यानी पहचान होगी तो ही भुगतान होगा।

चकबंदी वाले गांवों को राहत

विदित है कि सरकार ने यह भी समझा कि हर जगह स्थिति समान नहीं है। जिन गांवों में चकबंदी चल रही है, सर्वे अधूरा है वहां किसानों को अस्थायी राहत दी गई है। वे पुरानी व्यवस्था से भी फसल बेच सकेंगे, लेकिन सीमित दायरे में।

क्यों लिया गया यह फैसला, इसके लाभ?

आपको बता दें कि सरकार का दावा है कि इससे फर्जी किसानों पर रोक लगेगी। असली किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। हर जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और सब्सिडी और भुगतान में पारदर्शिता आएगी।

उत्तर प्रदेश में खेती अब पुराने तरीके से नहीं चलेगी। अब हर किसान को डिजिटल सिस्टम का हिस्सा बनना ही होगा। फार्मर आईडी, किसान की नई पहचान बनेगी।

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