UP पंचायत चुनाव देरी पर फूटा हाईकोर्ट का गुस्सा!: सरकार और चुनाव आयोग दोनों कटघरे में; कोर्ट ने पूछा- "क्या आप तय समय पर चुनाव करा पाएंगे या नहीं?"...जानें क्या हैं देरी की वजह और आगे की राह
UP पंचायत चुनाव देरी पर फूटा हाईकोर्ट का गुस्सा!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव की तैयारियों में देरी पर अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सीधे राज्य निर्वाचन आयोग से सवाल कर दिया है कि “क्या आप संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव करा पाएंगे या नहीं?” यह सवाल ही बताता है कि मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि संवैधानिक संकट की ओर बढ़ रहा है।

कोर्ट की सख्ती; अब देना होगा जवाब

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से स्पष्ट जवाब मांगा; कहा कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया का समयबद्ध शेड्यूल पेश करें। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख़ 25 मार्च को तय की है। कोर्ट ने साफ कहा कि 26 मई 2026 तक या उससे पहले चुनाव पूरे हो जाने चाहिए थे।

समयसीमा का दबाव क्यों?

आपको बता दें संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायत का कार्यकाल सिर्फ 5 साल होता है। उससे ज्यादा बढ़ाना संवैधानिक रूप से गलत है। यूपी में मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल। 2 मई 2026 को खत्म हो रहा है। यानी अगर चुनाव समय पर नहीं हुए तो संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है।

देरी की असली वजह क्या है?

सूत्रों और दलीलों के मुताबिक देरी के पीछे कई कारण हैं:

  1. मतदाता सूची (SIR) अपडेट

27 मार्च तक फाइनल लिस्ट तैयार होगी

  1. जनगणना का दबाव

प्रशासनिक अमला हाउस लिस्टिंग में व्यस्त

  1. आरक्षण प्रक्रिया अधूरी

अभी तक आरक्षण तय करने वाली कमेटी भी नहीं बनी

  1. राजनीतिक गणित

पंचायत चुनाव का असर 2027 विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। अंदरखाने कई दल चुनाव टालने के पक्ष में बताए जा रहे

किसकी जिम्मेदारी? सरकार या आयोग?

गौड़तलब है कि यहां सबसे बड़ा विवाद यहीं है कि आयोग कहता है तारीख तय करना सरकार की जिम्मेदारी है। संविधान कहता है चुनाव का नियंत्रण आयोग के पास है। कोर्ट ने इसी टकराव पर सवाल उठाया है

कोर्ट ने क्या-क्या पूछा?

हाईकोर्ट ने सीधे-सीधे पूछा:

•क्या आयोग समय पर चुनाव करा सकता है?
•19 फरवरी की अधिसूचना के अनुसार स्थिति क्या है?
•पूरा शेड्यूल कब तक तैयार होगा?

अब आयोग को हलफनामा देकर जवाब देना होगा

राजनीतिक असर भी बड़ा

आपको बता दें कि अगर चुनाव टलते हैं तो विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिलेगा। गांव स्तर पर राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। 2027 चुनाव की रणनीति पर असर पड़ेगा

अब आगे क्या?

गौरतलब है कि 25 मार्च को अगली सुनवाई में तस्वीर साफ होगी। कोर्ट तय करेगा कि देरी जायज है या नहीं। आयोग और सरकार, दोनों को जवाब देना पड़ेगा।

UP पंचायत चुनाव अब सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि संविधान vs प्रशासन vs राजनीति की लड़ाई बन चुका है। अब सबकी नजर हाईकोर्ट पर है क्योंकि अगला फैसला तय करेगा कि “समय पर चुनाव होंगे या फिर पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आएगा?”

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