लखनऊ : उत्तर प्रदेश में अब जमीन से जुड़े कामों के लिए लोगों को तहसील और कचहरी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। योगी सरकार ने राजस्व सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए खतौनी की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। अब किसान, जमीन मालिक और आम नागरिक घर बैठे मोबाइल या लैपटॉप से कुछ ही मिनटों में खतौनी की प्रमाणित कॉपी डाउनलोड कर सकेंगे।
अब क्या बदलेगा?
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि पहले खतौनी की प्रमाणित प्रति लेने के लिए लोगों को तहसील कार्यालय जाना पड़ता था, लंबी लाइनें लगानी पड़ती थीं और कई बार दिनों तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब नई ऑनलाइन व्यवस्था के तहत:
यानी अब जमीन से जुड़े जरूरी दस्तावेज हासिल करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।
क्या होती है खतौनी?
गौरतलब है कि खतौनी जमीन का एक महत्वपूर्ण राजस्व रिकॉर्ड होता है, जिसमें:
दर्ज रहती है। यह दस्तावेज जमीन खरीद-बिक्री, बैंक लोन, सरकारी योजनाओं और कानूनी मामलों में बेहद जरूरी माना जाता है।
कैसे मिलेगा ऑनलाइन खतौनी रिकॉर्ड?
आपको बता दें कि अब नागरिक राजस्व विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर:
इस पूरी प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।
किसानों और ग्रामीणों को सबसे ज्यादा फायदा
विदित है कि इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मिलेगा। अब उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इससे:
डिजिटल यूपी की दिशा में बड़ा कदम
गौरतलब है कि योगी सरकार पहले से ही भूमि रिकॉर्ड, संपत्ति पंजीकरण और राजस्व सेवाओं को ऑनलाइन करने पर जोर दे रही है। अब खतौनी की प्रमाणित प्रति ऑनलाइन मिलने से “डिजिटल यूपी” अभियान को और मजबूती मिलेगी।
सरकार का क्या कहना है?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस नई व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों को तेज, पारदर्शी और परेशानी मुक्त सेवा देना है। आने वाले समय में और भी राजस्व सेवाओं को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में यह बदलाव सिर्फ एक नई सुविधा नहीं, बल्कि जमीन से जुड़े पूरे सिस्टम को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब लोगों को सरकारी दफ्तरों की लंबी लाइन नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर ही अपनी जमीन का रिकॉर्ड मिल सकेगा।