लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश के दोनों डिप्टी सीएम को खुला ऑफर देते हुए बड़ा सियासी दांव चला है। उन्होंने कहा कि “हम अपना ऑफर फिर दोहराते हैं, 100 विधायक लेकर आओ और मुख्यमंत्री बन जाओ। जो 100 विधायक साथ लाएगा, वह एक हफ्ते के लिए मुख्यमंत्री बनेगा।” यह बयान उन्होंने गोरखपुर में कथित चिकित्सा लापरवाही से 19 लोगों की आंखों की रोशनी जाने की घटना को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए दिया।
गोरखपुर की घटना पर सरकार घिरी :
गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही के कारण लोगों को गंभीर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बताती हैं कि सरकार जनता की बुनियादी जरूरतों को संभालने में असफल हो रही है। इसी मुद्दे को आधार बनाकर उन्होंने सत्तारूढ़ दल के भीतर कथित अंतर्कलह पर भी तंज कसा और डिप्टी सीएम को मुख्यमंत्री बनने का “खुला ऑफर” दोहरा दिया।
बीजेपी के अंदर खींचतान का इशारा?
विदित है कि सपा अध्यक्ष का यह बयान राजनीतिक संकेतों से भरा माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास 100 विधायक हैं, तो वे सरकार बना सकते हैं। यह सीधा इशारा सत्ताधारी दल के भीतर संभावित असंतोष की ओर माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान सिर्फ तंज नहीं, बल्कि विपक्ष की ओर से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है।
शंकराचार्य विवाद पर भी सरकार पर हमला :
अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से जुड़े विवाद को भी उठाया। उन्होंने कहा कि माघ मेले में गंगा स्नान से रोकने की घटना अभूतपूर्व है और सरकार पर “अपमान” का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार 20 साल पुरानी घटनाओं को सामने लाकर धार्मिक भावनाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रंग दे रही है।
बयान के राजनीतिक मायने :
गौरतलब है कि डिप्टी सीएम को खुला ऑफर, बीजेपी में अंतर्कलह का आरोप, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल और धार्मिक मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला; यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश में राजनीतिक तापमान पहले से ही ऊंचा है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि सत्तारूढ़ दल की ओर से इस चुनौती पर क्या प्रतिक्रिया आती है। क्या यह बयान सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति छिपी है? उत्तर प्रदेश की सियासत में यह नया बयान आने वाले दिनों में और हलचल बढ़ा सकता है।