वाशिंगटन : अमेरिका में राष्ट्रपति के फैसले पर अदालत की बड़ी चोट पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आज से राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ की वसूली बंद कर दी जाएगी। तीन दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। अब अमेरिकी कस्टम एजेंसी ने साफ कर दिया है कि IEEPA कानून के तहत वसूले जा रहे शुल्क को रोका जा रहा है।
₹16 लाख करोड़ लौटाने का खतरा!
आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी सरकार को लगभग 175 अरब डॉलर (करीब ₹15.75–16 लाख करोड़) तक वापस करने पड़ सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन टैरिफ से अमेरिका को हर दिन लगभग 50 करोड़ डॉलर (₹4,500 करोड़) की कमाई हो रही थी। अब जब वसूली पर रोक लग गई है, तो कंपनियां रिफंड की मांग कर सकती हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि पहले से वसूला गया पैसा वापस किया जाएगा या नहीं।
किस कानून के तहत लगे थे टैरिफ?
गौरतलब है कि ये टैरिफ 1977 के कानून International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए थे। कोर्ट ने कहा कि इस कानून के जरिए इतने बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाना राष्ट्रपति की शक्ति से बाहर था।
ट्रम्प ने किया था पलटवार :
आपको बता दें कि फैसले के बाद ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कई देशों ने वर्षों तक अमेरिका को व्यापार में नुकसान पहुंचाया है और यदि कोई देश “गेम” खेलेगा तो उस पर और ऊंचे टैरिफ लगाए जाएंगे। ट्रम्प का दावा है कि कोर्ट के फैसले ने उनकी बाकी कानूनी शक्तियों को और मजबूत कर दिया है।
नया 15% ग्लोबल टैरिफ लागू :
विदित है कि कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रम्प ने नया 15% ग्लोबल टैरिफ घोषित कर दिया। यह टैरिफ Trade Act of 1974 के सेक्शन 122 के तहत लगाया गया है। इस कानून के अनुसार, राष्ट्रपति 150 दिनों तक अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं। उसके बाद इसे जारी रखने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी।
भारत पर क्या असर?
विदित है कि भारत भी अब 15% वाले ग्लोबल टैरिफ के दायरे में आ गया है। पिछले एक साल में अमेरिकी टैरिफ कई बार बदले पहले लगभग 26%, फिर 50% तक, बाद में 18%, अब 15%। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए कुछ राहत तो मिल सकती है, लेकिन अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि 150 दिन बाद क्या फैसला होता है।
कौन से टैरिफ जारी रहेंगे?
आपको बता दें कि यह आदेश सिर्फ IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ पर लागू है। सेक्शन 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा आधार), सेक्शन 301 (अनुचित व्यापार मामलों) के तहत लगाए गए टैरिफ जारी रहेंगे।
अब आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या अमेरिकी सरकार कंपनियों को वसूला गया पैसा लौटाएगी? क्या कांग्रेस 150 दिनों के बाद नए टैरिफ को मंजूरी देगी? और क्या यह फैसला अमेरिका की वैश्विक व्यापार रणनीति बदल देगा?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने अमेरिकी टैरिफ नीति को हिला दिया है। एक तरफ वसूली बंद, दूसरी तरफ नया 15% टैरिफ लागू हो चुका है। व्यापार की दुनिया में अनिश्चितता का दौर शुरू हो चुका है। अब देखना होगा कि यह कानूनी और आर्थिक जंग किस दिशा में जाती है।