ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध से भारत समेत वैश्विक बाजार में मचा हड़कंप!: पेट्रोल-गैस के बढ़े दाम, शेयर बाजार गिरा वहीं महंगाई...इस जंग का भारत पर असर_एक नज़र?
ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध से भारत समेत वैश्विक बाजार में मचा हड़कंप!

नई दिल्ली : पिछले 48 घंटों में पश्चिम एशिया युद्ध के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने भी जोरदार जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, इजराइल के शहरों और रणनीतिक इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरे क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है। लगातार बमबारी और जवाबी हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और शेयर बाजारों को हिला दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जंग सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित रहेगी या इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की जेब और बाजार पर पड़ेगा?

तेल बना सबसे बड़ा हथियार, कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं

आपको बता दें कि पश्चिम एशिया दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कुल तेल व्यापार का लगभग 20–25% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर खतरा बढ़ते ही तेल बाजार में उथल-पुथल शुरू हो गई है। कच्चे तेल की कीमतें कुछ ही दिनों में करीब 10% तक बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर संघर्ष बढ़ा तो कीमत 100 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। तेल महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल-डीजल, गैस, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा। यानी यह जंग आम लोगों के किचन और जेब तक असर डाल सकती है।

भारत पर सबसे बड़ा खतरा; तेल आपूर्ति और महंगाई :

गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 88-90% कच्चा तेल आयात करता है, और इसका बड़ा हिस्सा इसी खाड़ी क्षेत्र से आता है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आती है या शिपिंग रुकती है, तो भारत पर ये असर पड़ सकते हैं:

•पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी

•एलपीजी सिलेंडर महंगे होने की संभावना

•ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से खाद्य और जरूरी सामान महंगे

•सरकार का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ेगा

यह स्थिति महंगाई को अचानक बढ़ा सकती है।

शेयर बाजार में डर, निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर भाग रहे

विदित है कि जैसे ही युद्ध की खबरें आईं, वैश्विक शेयर बाजारों में घबराहट फैल गई। खाड़ी देशों के कुछ प्रमुख शेयर बाजार अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए। भारत में भी सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव देखा गया। निवेशक जोखिम वाले शेयर बेचकर सोना और सुरक्षित निवेश की ओर जा रहे हैं। ऐसे समय में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव होना आम बात है।

हवाई उड़ानें रद्द, व्यापार और यात्रा प्रभावित

गौरतलब है कि युद्ध के कारण कई देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या डायवर्ट की गईं। एयरलाइंस को लंबा और महंगा रूट लेना पड़ रहा है। शिपिंग कंपनियों ने कुछ समुद्री मार्गों से जहाज भेजना रोक दिया। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर बड़ा असर पड़ रहा है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ तो दुनिया को लग सकता है सबसे बड़ा झटका। होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है। अगर यह मार्ग बंद या असुरक्षित होता है:

•दुनिया की तेल आपूर्ति अचानक कम हो जाएगी

•तेल और गैस की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आ सकता है

•वैश्विक महंगाई और आर्थिक संकट पैदा हो सकता है

यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर :

आपको बता दें कि इस युद्ध का असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई क्षेत्रों पर पड़ेगा:

•अंतरराष्ट्रीय व्यापार धीमा हो सकता है

•बीमा और शिपिंग लागत बढ़ेगी

•एयरलाइन और पर्यटन उद्योग प्रभावित होंगे

•वैश्विक आर्थिक विकास दर पर दबाव पड़ेगा

क्या यह जंग दुनिया को आर्थिक संकट की ओर ले जा सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संघर्ष लंबा चला, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कीमतों में उछाल, बाजार की गिरावट और आपूर्ति संकट मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि यहां ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है।

जंग की आग से पूरी दुनिया प्रभावित है। पश्चिम एशिया में शुरू हुआ यह संघर्ष अब वैश्विक आर्थिक संकट की चेतावनी बन चुका है। तेल, शेयर बाजार, व्यापार और महंगाई, हर क्षेत्र पर इसका असर दिखाई देने लगा है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर शेयर बाजार और आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी तक सब कुछ प्रभावित हो सकता है।

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