तेहरान : मिडिल-ईस्ट में युद्ध की आग अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में मौत का दावा सामने आया है। ईरानी सरकारी मीडिया से जुड़े सूत्रों ने बताया कि तेहरान समेत कई शहरों पर हुए भीषण हमलों में खामेनेई के साथ उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए। इस खबर के बाद पूरे ईरान में शोक की लहर दौड़ गई है, जबकि सेना ने खुली चेतावनी दी है कि “सबसे खतरनाक जवाबी हमला जल्द शुरू होगा।” इसके साथ ही ईरान ने सऊदी अरब, UAE सहित 11 देशों के अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हमला कर दिया है।
तेहरान पर हमला और खामनेई की मौत का दावा :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शनिवार देर रात ईरान की राजधानी तेहरान और आसपास के इलाकों में जोरदार धमाके हुए। मिसाइल और ड्रोन हमलों ने कई सैन्य और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन्हीं हमलों में देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हमले में उनके परिवार के करीबी सदस्य; बेटी, दामाद, बहू और पोती भी मारे गए। इस घटना के बाद ईरान सरकार ने 40 दिन के राष्ट्रीय शोक और कई दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा कर दी।
ईरान की सेना का ऐलान: “अब होगा सबसे खतरनाक पलटवार”
गौरतलब है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और सेना ने इसे “राष्ट्र पर सीधा हमला” बताते हुए बदले की कसम खाई है। सेना ने कहा कि अमेरिकी और इजराइली ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर जवाबी सैन्य अभियान शुरू किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, ईरान पहले ही सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन लॉन्च कर चुका है और मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अलर्ट पर रखा गया है।
पूरा मिडिल-ईस्ट युद्ध के मुहाने पर
आपको बता दें कि हमले के बाद हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने इजराइल की ओर सैकड़ों मिसाइलें दागीं। खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। कई शहरों में विस्फोट, आग और भारी तबाही की खबरें सामने आईं। ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत और सैकड़ों घायल होने की आशंका है।
तेल बाजार में हड़कंप, दुनिया पर पड़ेगा असर :
विदित है कि मिडिल-ईस्ट दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। ईरान-इजराइल टकराव के बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल का खतरा पैदा हो गया है। अगर युद्ध लंबा चला, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई?
आपको बता दें कि अयातुल्ला अली खामेनेई पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। 1989 में उन्हें देश का सुप्रीम लीडर बनाया गया था। विदेश नीति, सेना और परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम फैसला उन्हीं का होता था। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का रक्षक मानते थे, जबकि आलोचक उन्हें सख्त और कट्टर शासक बताते थे। उनकी कमान में ईरान ने मिडिल-ईस्ट में अपनी सैन्य और राजनीतिक ताकत काफी बढ़ाई।
आखिर खामेनेई के पीछे क्यों पड़े थे अमेरिका और इजराइल?
अयातुल्ला अली खामेनेई सिर्फ एक धार्मिक नेता नहीं थे, बल्कि ईरान की सेना, परमाणु कार्यक्रम और विदेश नीति के अंतिम निर्णयकर्ता थे। यही वजह थी कि अमेरिका और इजराइल उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते थे।
परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ी वजह
आपको बता दें कि अमेरिका और इजराइल को लंबे समय से शक था कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता है। हालांकि ईरान हमेशा कहता रहा कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और रिसर्च के लिए है, लेकिन इजराइल इसे अपने अस्तित्व के लिए सीधा खतरा मानता था।
इजराइल विरोधी नीति :
खामेनेई ने खुलकर इजराइल का विरोध किया और फिलिस्तीन का समर्थन किया। उनके नेतृत्व में ईरान ने हिजबुल्लाह, हमास और अन्य समूहों को समर्थन दिया, जिन्हें इजराइल अपना दुश्मन मानता है।
मिडिल-ईस्ट में ईरान का बढ़ता प्रभाव
ईरान ने इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में अपना प्रभाव बढ़ाया। अमेरिका का आरोप था कि खामेनेई क्षेत्र में अपने समर्थक संगठनों के जरिए शक्ति संतुलन बदल रहे थे।
अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों के लिए खतरा
गौरतलब है कि मिडिल-ईस्ट में कई अमेरिकी सैन्य बेस हैं। ईरान बार-बार चेतावनी देता रहा कि अगर उस पर हमला हुआ, तो अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
सत्ता परिवर्तन की रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई को हटाने से ईरान की राजनीतिक और सैन्य संरचना कमजोर हो सकती थी, जिससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल सकता है।
सत्ता में संकट और संभावित राजनीतिक भूचाल :
खामेनेई की मौत का दावा ईरान के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है। अब नया सुप्रीम लीडर कौन होगा, इस पर सैन्य, धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व के बीच संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सत्ता संघर्ष शुरू हुआ, तो यह सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि पूरे मिडिल-ईस्ट की स्थिरता को हिला सकता है।
दुनिया की नजर अब ईरान के अगले कदम पर है कि खामेनेई की मौत के दावे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान किस स्तर तक जवाब देगा। अगर जवाबी हमला बड़े पैमाने पर हुआ, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष को वैश्विक युद्ध में बदल सकता है। तेहरान की सड़कों पर मातम है, लेकिन सेना के बयान साफ संकेत दे रहे हैं कि यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि अब असली टकराव शुरू हो सकता है।