विश्व : मध्य पूर्व में तनाव बढ़ते ही एक सवाल फिर सुर्खियों में है कि आखिर ऐसा क्या है कि अमेरिका हर हाल में इजराइल के साथ खड़ा दिखता है? चाहे मामला ईरान से टकराव का हो या वैश्विक दबाव का, अमेरिका बार-बार इजरायल के पक्ष में खुलकर उतरता है। यह रिश्ता सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि रणनीति, तकनीक, राजनीति और इतिहास का ऐसा गठजोड़ है, जिसने दोनों देशों को एक-दूसरे का सबसे बड़ा सहयोगी बना दिया है। आइये जानतें हैं इसके पीछे की 7 वजहें :
1. मध्य पूर्व में अमेरिका का ‘अटूट किला’
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका इजरायल को मध्य पूर्व में अपना सबसे भरोसेमंद ठिकाना मानता है। तेल-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र के बीच इजरायल अमेरिका के लिए “आंख और कान” की तरह काम करता है। ईरान जैसे देशों के साथ बढ़ते तनाव में इजरायल कई बार अमेरिका के हितों की ढाल बनकर सामने आया है।
2. हथियारों की लाइव ‘टेस्ट लैब’
गौरतलब है कि हर साल अरबों डॉलर की सैन्य सहायता देने के बावजूद अमेरिका को सीधा फायदा मिलता है। इजरायल इन पैसों से अमेरिकी हथियार खरीदता है, जैसे F-35 फाइटर जेट और युद्ध में इनके इस्तेमाल से मिलने वाला डेटा अमेरिका की कंपनियों को जाता है। इसी से मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसे आयरन डोम और आधुनिक हथियार लगातार बेहतर होते रहते हैं।
3. खुफिया नेटवर्क: दुनिया में सबसे तेज
आपको बता दें कि इजरायल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' का नेटवर्क मध्य पूर्व में बेहद मजबूत माना जाता है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम से लेकर आतंकी संगठनों तक की कई अहम जानकारियां अमेरिका को यहीं से मिलती हैं जो उसकी सुरक्षा रणनीति में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
4. टेक्नोलॉजी और इकोनॉमी का गहरा रिश्ता
विदित है कि इजरायल को “स्टार्टअप नेशन” कहा जाता है। Intel, Google और Microsoft जैसी दिग्गज कंपनियों के बड़े रिसर्च सेंटर इजरायल में हैं। सिलिकॉन वैली और तेल अवीव के बीच यह साझेदारी दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देती है।
5. अमेरिकी राजनीति में इजरायल का असर
गौरतलब है कि अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी इजरायल का बड़ा प्रभाव है। AIPAC जैसे शक्तिशाली लॉबी समूह चुनावों में प्रभाव डालते हैं। इसी वजह से कोई भी अमेरिकी नेता खुलकर इजरायल के खिलाफ जाने से बचता है क्योंकि इसका सीधा असर उसके राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है।
6. धर्म और भावनात्मक जुड़ाव
आपको बता दें कि अमेरिका में बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय इजरायल का समर्थन धार्मिक आस्था से जोड़कर देखता है। यहूदियों की सुरक्षा को कई लोग अपना नैतिक कर्तव्य मानते हैं जिससे यह रिश्ता सिर्फ रणनीतिक नहीं, भावनात्मक भी बन जाता है।
7. इतिहास भी जोड़ता है ये रिश्ता
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब यहूदी वैज्ञानिक और बुद्धिजीवी अमेरिका पहुंचे, तो उन्होंने देश को सुपरपावर बनाने में अहम भूमिका निभाई। अल्बर्ट आइंस्टाइन, एडवर्ड टेलर और जॉन वॉन न्यूमैन जैसे नामों ने अमेरिका की वैज्ञानिक ताकत को नई ऊंचाई दी। वहीं ऑपरेशन पेपरक्लिप के जरिए वैज्ञानिकों को शामिल कर अमेरिका ने अपनी तकनीकी शक्ति और बढ़ाई।
अमेरिका-इजरायल का रिश्ता सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी, राजनीतिक मजबूरी, तकनीकी सहयोग और ऐतिहासिक जुड़ाव का मिश्रण है। इसी वजह से जब भी इजरायल पर संकट आता है, अमेरिका सिर्फ समर्थन नहीं देता बल्कि हर मोर्चे पर साथ खड़ा नजर आता है।