नई दिल्ली : पूरी दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता और मंदी की आशंकाओं के बीच भारत ने एक बार फिर ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने देश की वैश्विक ताकत को नई पहचान दे दी है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संस्था International Organization for Migration की ‘विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026’ में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2024 में विदेशों में रह रहे भारतीयों ने अपने देश में 137 अरब डॉलर यानी लाखों करोड़ रुपये भेजे। इसके साथ ही भारत लगातार दुनिया में सबसे ज्यादा विदेशी धन प्राप्त करने वाला देश बन गया है। सबसे बड़ी बात यह रही कि भारत ऐसा इकलौता देश बना, जिसने 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया।
पूरी दुनिया में भारतीयों का दबदबा
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय प्रवासी आज दुनिया के लगभग हर बड़े देश में अपनी मेहनत और प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। चाहे अमेरिका की टेक कंपनियां हों, खाड़ी देशों के निर्माण प्रोजेक्ट हों, यूरोप के अस्पताल हों या ऑस्ट्रेलिया-कनाडा के बिजनेस सेक्टर, हर जगह भारतीयों की मजबूत मौजूदगी दिखाई दे रही है। इन्हीं प्रवासी भारतीयों ने 2024 में रिकॉर्ड रकम अपने परिवारों और भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भेजी।
कैसे बढ़ता गया भारत का विदेशी धन?
गौरतलब है कि रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 14 सालों में भारत को विदेश से मिलने वाली रकम में जबरदस्त उछाल आया है:
वर्ष - भारत को मिली रकम
2010 - 53.48 अरब डॉलर
2015 - 68.91 अरब डॉलर
2020 - 83.15 अरब डॉलर
2024 - 137.67 अरब डॉलर
यानी सिर्फ चार साल में ही भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2024 में पिछले साल के मुकाबले लगभग 11.8% की वृद्धि हुई।
भारत क्यों बना दुनिया का नंबर-1?
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:
‘ब्रेन ड्रेन’ नहीं, अब ‘ब्रेन गेन’!
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अब “ब्रेन ड्रेन” की पुरानी समस्या को “ब्रेन गेन” में बदलने की कोशिश कर रहा है। पहले माना जाता था कि विदेश जाने वाले प्रतिभाशाली लोग भारत को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन अब वही भारतीय विदेशों से निवेश ला रहे हैं, टेक्नोलॉजी ला रहे हैं, स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं और भारत की वैश्विक पहचान मजबूत कर रहे हैं। सरकार भी प्रवासी भारतीय सम्मेलन और नवाचार केंद्र जैसी योजनाओं के जरिए इस नेटवर्क को मजबूत करने में लगी है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को कितना फायदा?
विदित है कि विदेश से आने वाला यह पैसा सिर्फ परिवारों तक सीमित नहीं रहता। इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। इससे गांवों में घर बनते हैं, बच्चों की पढ़ाई होती है, छोटे बिजनेस शुरू होते हैं, बैंकिंग और निवेश बढ़ता है और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होता है। यानी प्रवासी भारतीय आज भारत की आर्थिक रीढ़ बनते जा रहे हैं।
किन देशों को मिला भारत के बाद सबसे ज्यादा पैसा?
रिपोर्ट के मुताबिक भारत पहले स्थान पर रहा, मेक्सिको दूसरे नंबर पर, फिलीपींस तीसरे स्थान पर और फ्रांस चौथे स्थान पर रहा। लेकिन भारत का आंकड़ा बाकी देशों से काफी आगे रहा। भारत एकमात्र देश रहा जिसने 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया।
दुनिया में भारत की आर्थिक ताकत बढ़ रही है। विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026 ने साफ संकेत दिया है कि भारत अब सिर्फ जनसंख्या के मामले में ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक नेटवर्क में भी बड़ी ताकत बन चुका है। विदेशों में बसे करोड़ों भारतीय अब केवल “एनआरआई” नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति के सबसे बड़े स्तंभ बनते जा रहे हैं।