LPG संकट के बीच भारत को बड़ी राहत!: 92 हजार मिट्रिक टन LPG लेकर भारत आ रहे 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' टैंकर, भारतीय नौसेना ने...जानें भारत के लिए क्यों अहम है यह सप्लाई?
LPG संकट के बीच भारत को बड़ी राहत!

विश्व/नई दिल्ली : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका असर भारत में भी देखने को मिला, जहां कई जगहों पर एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई थी। इसी बीच सरकार की ओर से राहत भरी खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नाम के दो बड़े एलपीजी टैंकर जल्द ही भारत पहुंचने वाले हैं, जो देश में गैस सप्लाई को स्थिर करने में मदद करेंगे।

92 हजार टन LPG लेकर आ रहे टैंकर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों टैंकरों में करीब 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी गैस भारत लाई जा रही है। ‘शिवालिक’ टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है और 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचने की संभावना है। वहीं ‘नंदा देवी’ टैंकर भी इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से निकल चुका है और 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर पहुंचेगा। इन जहाजों के पहुंचने के बाद देश में एलपीजी की आपूर्ति को और तेज किया जा सकेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम

गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण कई टैंकर इस मार्ग में फंस गए थे, जिससे सप्लाई प्रभावित हो गई।

भारतीय नौसेना की निगरानी में आगे बढ़ रहे जहाज

विदित है कि सरकारी सूत्रों के अनुसार भारतीय ध्वज वाले इन टैंकरों को सुरक्षित मार्ग देने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए गए। बताया जा रहा है कि भारतीय नौसेना भी समुद्री मार्ग पर नजर बनाए हुए है ताकि जहाज सुरक्षित तरीके से भारत के बंदरगाहों तक पहुंच सकें।

क्या है ‘उत्तराखंड कनेक्शन’?

आपको बता दें कि इन दोनों एलपीजी टैंकरों के नाम उत्तराखंड की प्रसिद्ध पर्वत श्रृंखलाओं से जुड़े हैं। शिवालिक का नाम हिमालय की शिवालिक पर्वत श्रृंखला से लिया गया है। नंदा देवी उत्तराखंड की सबसे प्रसिद्ध और पवित्र पर्वत चोटियों में से एक मानी जाती है, जिसे वहां देवी स्वरूप में पूजा जाता है। इन नामों के जरिए भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भी दर्शाया गया है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह सप्लाई

गौरतलब है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में शामिल है और एलपीजी घरेलू रसोई से लेकर उद्योग तक कई क्षेत्रों में इस्तेमाल होती है। ऐसे में इन दोनों टैंकरों के भारत पहुंचने से गैस की सप्लाई बेहतर होने और बाजार में घबराहट कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सब मिलाकर, पश्चिम एशिया के तनाव के बीच ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ टैंकर भारत के लिए बड़ी राहत लेकर आ रहे हैं, जिससे देश में एलपीजी सप्लाई को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

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