लखनऊ : उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के बीच शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर असंतोष अब खुलकर सड़क पर उतरने की तैयारी में है। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर फिर से TET की शर्त लागू करना उनके अनुभव और योगदान के साथ अन्याय है। इसी मुद्दे को लेकर अब राज्यभर में आंदोलन तेज हो गया है और राजधानी लखनऊ में बड़े शक्ति प्रदर्शन की घोषणा कर दी गई है।
तीन मई को लखनऊ में होगी बड़ी रैली और विधानसभा मार्च :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने घोषणा की है कि 3 मई को लखनऊ के ईको गार्डन में विशाल शिक्षक रैली आयोजित की जाएगी, जिसके बाद शिक्षक विधानसभा तक मार्च करेंगे। महासंघ का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। महासंघ के पदाधिकारियों के अनुसार, यह केवल एक रैली नहीं बल्कि शिक्षकों के अधिकारों की निर्णायक लड़ाई होगी। हजारों शिक्षकों के राजधानी पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।
आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम तैयार :
गौरतलब है कि शिक्षक संगठनों ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है -
●9 से 15 मार्च: शिक्षक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश को ई-मेल और पोस्टकार्ड के जरिए अपनी मांग भेजेंगे।
●13 अप्रैल: जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
●3 मई: लखनऊ में विशाल रैली और विधानसभा मार्च।
●इसके बाद भी समाधान न हुआ तो मानसून सत्र के दौरान दिल्ली में संसद भवन का घेराव करने की चेतावनी।
महासंघ के संयोजक अनिल यादव ने साफ कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक शिक्षकों को TET अनिवार्यता से राहत नहीं मिल जाती।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद :
गौरतलब है कि शिक्षक संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान पर भी नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान TET अनिवार्यता पर सरकार बनने के बाद विचार करने की बात कही थी। शिक्षक नेताओं ने इसे राजनीतिक बयान बताते हुए कहा कि शिक्षा और शिक्षकों के भविष्य को राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है।
कई शिक्षक संगठन आए समर्थन में :
विदित है कि इस आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक एसोसिएशन, वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन और एससी-एसटी शिक्षक संघ सहित कई संगठनों ने महासंघ के आंदोलन का समर्थन किया है। इससे आंदोलन के और मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।
शिक्षकों की मुख्य मांग क्या है
शिक्षकों का कहना है कि जो शिक्षक वर्षों से पढ़ा रहे हैं और नियमित सेवा में हैं, उनसे दोबारा TET की अनिवार्यता लागू करना अनुचित है। उनका तर्क है कि अनुभव और सेवा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि नई पात्रता शर्तों को।
सरकार के सामने बढ़ेगा दबाव :
आपको बता दें कि लखनऊ में प्रस्तावित रैली को लेकर प्रशासन और सरकार की नजरें टिकी हुई हैं। अगर बड़ी संख्या में शिक्षक राजधानी पहुंचते हैं, तो यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर बड़ा रूप ले सकता है।
शिक्षक संगठनों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब यह केवल मांग नहीं, बल्कि अधिकार की लड़ाई है, और जरूरत पड़ी तो यह आंदोलन लखनऊ से दिल्ली तक जाएगा।