लखनऊ : उत्तर प्रदेश में कामगारों और उद्योग जगत से जुड़ा सबसे बड़ा बदलाव अब बस कुछ कदम दूर है। योगी सरकार अप्रैल 2026 से प्रदेश में नए लेबर कोड को लागू करने की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए सरकार ने पूरी रणनीति तय कर ली है और अब अगला कदम जनता और हितधारकों से आपत्तियां मांगना है। सरकार जनवरी में लेबर कोड बिल का प्रकाशन करेगी, जिसके बाद 45 दिनों तक आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। इन आपत्तियों पर जरूरी सुधार के बाद बिल को अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाएगा। इसके बाद प्रदेश में काम करने वाली हर कंपनी, फैक्ट्री और संस्थान को नए नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
क्या है नया लेबर कोड और क्यों है इतना अहम?
आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को समेटकर उन्हें 4 लेबर कोड में बदल दिया है। यह व्यवस्था पहले ही केंद्र स्तर पर लागू हो चुकी है। राज्यों को इसे अपनाने के लिए समय दिया गया था। उसी क्रम में योगी सरकार ने भी कदम बढ़ाते हुए श्रम विभाग के जरिए बिल में प्रदेश की जरूरत के अनुसार मामूली संशोधन कराए हैं। संशोधित ड्राफ्ट को विधि विभाग भेजा जा चुका है। वहां से हरी झंडी मिलते ही बिल सार्वजनिक किया जाएगा।
अब नियुक्ति पत्र देना होगा मजबूरी:
गौरतलब है कि नए लेबर कोड का सबसे बड़ा और असरदार प्रावधान है; नियुक्ति पत्र का अनिवार्य होना। अब कोई भी कंपनी अगर किसी कर्मचारी को स्थायी, अस्थायी, संविदा, दिहाड़ी, आउटसोर्स किसी भी रूप में रखती है, तो उसे लिखित नियुक्ति पत्र देना ही होगा। इसमें वेतन, सेवा शर्तें और अन्य अधिकार साफ-साफ लिखे होंगे। अब “मौखिक नौकरी” का दौर खत्म होने वाला है।
50% बेसिक पे अनिवार्य, EPF-ESI से नहीं बचेंगी कंपनियां :
गौरतलब है कि कई कंपनियां EPF से बचने के लिए बेसिक सैलरी बेहद कम दिखाती थीं। नया लेबर कोड इस रास्ते को बंद कर देगा। कुल सैलरी का कम से कम 50% बेसिक पे रखना अनिवार्य होगा। EPF और ESI का लाभ हर हाल में देना होगा। साथ ही फिक्स टर्म कर्मचारियों को भी काम के दिनों के हिसाब से ग्रेच्युटी मिलेगी। सरकार का दावा है कि इससे कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन भविष्य की सुरक्षा मजबूत होगी।
40 पार कर्मचारियों का हर साल हेल्थ चेकअप :
नए नियमों में कर्मचारियों की सेहत पर भी जोर है। 40 साल से अधिक उम्र के कर्मचारियों का सालाना हेल्थ चेकअप अब कंपनी को कराना होगा।
एक लाइसेंस, पूरा देश :
आपको बता दें कि उद्योग जगत के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं। अब अलग-अलग राज्यों में फैक्ट्री खोलने के लिए अलग लाइसेंस नहीं चाहिए होगा। एक ही लाइसेंस पूरे देश में मान्य होगा। उद्यमी सिर्फ भारत सरकार के पोर्टल पर आवेदन कर कहीं भी कारोबार शुरू कर सकेंगे।
इंस्पेक्टर राज खत्म, अब होंगे ‘फैसिलिटेटर’ :
नए लेबर कोड के साथ इंस्पेक्टर राज पर बड़ी चोट की गई है। लेबर इंस्पेक्टर अब फैसिलिटेटर कहलाएंगे। वे सीधे मुकदमा दर्ज नहीं कर सकेंगे। पहली बार नियम तोड़ने पर सिर्फ कंपाउंड फी लगेगी। बार-बार उल्लंघन पर ही FIR का प्रावधान रहेगा। सरकार का मानना है कि इससे उद्योगों में भय का माहौल खत्म होगा और निवेश बढ़ेगा।
78 रजिस्टर से छुटकारा, अब सिर्फ 8 में काम :
गौरतलब है कि अब रिटर्न फाइलिंग भी आसान होगी। पहले 78 अलग-अलग रजिस्टर थे, अब सिर्फ 8 यूनिफाइड रजिस्टर रहेंगे और सिंगल रिटर्न सिस्टम लागू होगा। यह बदलाव छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
क्या बोले श्रमायुक्त?
श्रमायुक्त मार्कण्डेय शाही ने बताया कि प्रदेश में चारों लेबर कोड अप्रैल से लागू करने की तैयारी है।
उन्होंने कहा कि “बिल में प्रदेश की जरूरत के अनुसार संशोधन किए गए हैं। विधि विभाग से अंतिम सुधार के बाद इसका प्रकाशन होगा। 45 दिन तक आपत्तियां ली जाएंगी, फिर अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।”
क्यों है यह खबर हर कर्मचारी और उद्यमी के लिए अहम?
आपको बता दें कि यह खबर इसलिये सबसे ज्यादा अहम है क्योंकि यह सिर्फ कानून नहीं, बल्कि नौकरी की सुरक्षा, पारदर्शी वेतन व्यवस्था, उद्योगों को राहत, इंस्पेक्टर राज से मुक्ति जैसे बड़े बदलाव लेकर आ रहा है।
अब देखना यह होगा कि 45 दिन की आपत्ति प्रक्रिया में क्या नए सुझाव आते हैं और अंतिम बिल किस रूप में लागू होता है। लेकिन इतना तय है कि अप्रैल से यूपी का श्रम तंत्र पूरी तरह बदलने वाला है।