नोएडा-ग्रेटर नोएडा; यमुना पुश्ते पर 30 किमी लम्बी एलिवेटेड रोड! अपडेट: लखनऊ में हाईलेवल मीटिंग के बाद बढ़ी हलचल, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ ही...
नोएडा-ग्रेटर नोएडा; यमुना पुश्ते पर 30 किमी लम्बी एलिवेटेड रोड! अपडेट

लखनऊ/नोएडा : नोएडा और दिल्ली-NCR की ट्रैफिक तस्वीर बदलने वाली एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर योजना पर काम तेज हो गया है। यमुना पुश्ता पर एलिवेटेड रोड बनाने की तैयारी अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। इस मेगा प्रोजेक्ट से जहां नोएडा एक्सप्रेसवे का ट्रैफिक दबाव कम होगा, वहीं इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को सीधा बूस्ट मिलेगा।

क्यों जरूरी हो गई एलिवेटेड रोड?

गौरतलब है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या ने नोएडा एक्सप्रेसवे को लगभग हर समय जामग्रस्त बना दिया है। दूसरी ओर, Noida International Airport के शुरू होने से ट्रैफिक और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में यमुना पुश्ता के साथ-साथ एक एलिवेटेड कॉरिडोर को वैकल्पिक और फास्ट रूट के रूप में देखा जा रहा है।

लखनऊ में हाईलेवल मीटिंग, प्रोजेक्ट पर मंथन :

आपको बता दें कि इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर लखनऊ में उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें यमुना पुश्ता रोड पर प्रस्तावित एलिवेटेड प्रोजेक्ट की जियोग्राफिक मैपिंग, डिजाइन, तकनीकी मॉडल और फंडिंग पैटर्न पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में आईडीसी दीपक कुमार के साथ वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। माना जा रहा है कि कुछ ही दिनों में इस प्रोजेक्ट पर अंतिम मुहर लग सकती है।

एनओसी बना था सबसे बड़ी बाधा :

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब तक इस योजना की राह में सबसे बड़ा रोड़ा रहा है सिंचाई विभाग की एनओसी। करीब तीन महीने पहले विभाग ने स्पष्ट किया था कि तटबंध के पास निर्माण से ड्रेनेज चैनल प्रभावित हो सकते हैं साथ ही एम्बैंकमेंट की सुरक्षा को खतरा हो सकता है इसी वजह से पहले अनुमति नहीं मिली थी। अब नई तकनीक और पूरी तरह एलिवेटेड स्ट्रक्चर के जरिए इन आपत्तियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है। संकेत हैं कि इस बार सिंचाई विभाग सशर्त एनओसी दे सकता है।

कितनी लंबी होगी सड़क, कितना आएगा खर्च?

विदित है कि यह सड़क सेक्टर-94 से सेक्टर-150 तक करीब 23 किमी लंबी होगी। इसके आगे Yamuna Expressway तक जोड़ने की योजना है। कुल लंबाई लगभग 30 किमी होगी। इस प्रोजेक्ट की लागत हजारों करोड़ रुपए में आंकी जा रही है। इतना बड़ा बजट अकेले नोएडा प्राधिकरण के लिए संभव नहीं, इसलिए इसे PPP मॉडल (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) पर लाने की तैयारी है। टोल के जरिए लागत वसूली की जा सकती है।

कौन बनाएगा सड़क?

आपको बता दें कि निर्माण एजेंसी को लेकर दो नाम प्रमुख हैं:

National Highways Authority of India (NHAI)

Yamuna Expressway Industrial Development Authority (YEIDA)

नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में पहले ही यूपीडा को जिम्मेदारी देने और खर्च तीनों प्राधिकरणों में बांटने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।

एयरपोर्ट और एक्सप्रेसवे; दोनों को फायदा :

आपको बता दें कि एलिवेटेड रोड बनने से दिल्ली से एयरपोर्ट तक सीधी और तेज कनेक्टिविटी होगी। नोएडा एक्सप्रेसवे पर जाम से राहत मिलने के साथ ही लॉजिस्टिक्स, निवेश और रियल एस्टेट को नई रफ्तार मिलेगी। और NCR में ट्रैफिक का बेहतर बंटवारा हो सकेगा।

अब सबकी नजरें सिंचाई विभाग की एनओसी, निर्माण एजेंसी के फाइनल चयन और PPP मॉडल की शर्तों पर टिकी हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो यमुना पुश्ता पर एलिवेटेड रोड नोएडा के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।

अन्य खबरे