नई दिल्ली : दिल्लीवासियों के लिए राहत भरी खबर है। राजधानी की सड़कों, बसों और मेट्रो को लेकर सरकार ने इस बार बड़ा और निर्णायक दांव चला है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर को ऐसा बजट मिला है, जो सीधे आम आदमी की रोज़मर्रा की यात्रा को आसान, तेज और सुरक्षित बनाने वाला है। सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब जाम, गड्ढे और भीड़भाड़ पर फोकस्ड हमला होगा।
परिवहन बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी :
आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने परिवहन क्षेत्र के लिए संशोधित बजट (RE) में बड़ा इजाफा किया है।
पहले बजट अनुमान (BE): ₹12,952 करोड़
अब संशोधित बजट (RE): ₹16,024 करोड़
यानी सीधे-सीधे हजारों करोड़ रुपये सड़क, पुल, फ्लाईओवर और ट्रैफिक सुधार पर खर्च होंगे। यह बढ़ोतरी बताती है कि सरकार अब कागज़ी योजनाओं से आगे निकलकर जमीनी बदलाव चाहती है।
सड़कों पर चलेगा मरम्मत मिशन :
गौरतलब है कि राजधानी की बदहाल सड़कों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। अब सरकार ने इसके लिए अलग से ₹496 करोड़ का प्रावधान किया है।
क्या बदलेगा?
गड्ढों की मरम्मत
कमजोर सड़कों का सुदृढ़ीकरण
उड़ती धूल में कमी
वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की सुरक्षा
अच्छी सड़कें सिर्फ सफर आसान नहीं बनातीं, बल्कि प्रदूषण घटाने में भी मदद करती हैं।
बसों को मिलेगा नया दम :
विदित है कि दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली बस सेवा को भी बूस्टर डोज मिला है। Delhi Transport Corporation (DTC) को ₹653 करोड़ की अतिरिक्त राशि दी गई है। इससे नई बसों की खरीद, पुरानी बसों की बेहतर मेंटेनेंस, इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार और बसों की संख्या और गुणवत्ता बढ़ेगी तो निजी गाड़ियों पर निर्भरता घटेगी, और यही जाम कम करने की सबसे बड़ी कुंजी है।
मेट्रो से जाम पर लगाम :
दिल्ली की ट्रैफिक समस्या का सबसे कारगर समाधान मेट्रो रही है। Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) को इस बार ₹2,117 करोड़ अतिरिक्त मिले हैं।
कुल मेट्रो बजट: ₹5,046.66 करोड़
इससे मेट्रो नेटवर्क का विस्तार, बेहतर फ्रीक्वेंसी और संचालन और ज्यादा लोग मेट्रो से सफर करेंगे। नतीजतन सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम होगा।
शहर की प्लानिंग भी होगी मजबूत :
आवास और शहरी विकास के लिए बजट बढ़ाकर ₹11,754 करोड़ कर दिया गया है। बेहतर शहरी योजना, नई सड़कें और मजबूत कनेक्टिविटी से शहर के अंदर और बाहरी इलाकों के बीच सफर और आसान होगा।
पूंजीगत व्यय बढ़ने का बड़ा मतलब :
आपको बता दें कि पूंजीगत व्यय को ₹28,115 करोड़ से बढ़ाकर ₹30,248 करोड़ कर दिया गया है।
यानी सरकार स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश कर रही है। सड़कें, पुल, फ्लाईओवर, बस डिपो और ट्रांसपोर्ट सिस्टम ये वो खर्च हैं, जिनका असर सालों तक दिखेगा, सिर्फ चुनावी मौसम तक नहीं।
कुल मिलाकर क्या बदलेगा, और फायदे?
● सफर होगा तेज और सुरक्षित
● जाम और गड्ढों से राहत
● बस-मेट्रो मजबूत, निजी गाड़ियों पर निर्भरता कम
● प्रदूषण पर भी पड़ेगा असर
दिल्ली सरकार का यह बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि हर रोज़ ऑफिस जाने वाले, बच्चों को स्कूल छोड़ने वाले और लंबी दूरी तय करने वाले लाखों लोगों के लिए राहत का रोडमैप है। अगर योजनाएं जमीन पर उतरीं, तो आने वाले महीनों में दिल्ली का सफर वाकई पहले से कहीं ज्यादा सुगम और आसान हो सकता है।