सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को लगाई कड़ी फटकार!: अब आपकी जगह जेल में हैं, आपका अहंकार...जानिए आखिर क्या हैं 16 साल पुराना मामला जिसने बढ़ाई राजपाल यादव की मुश्किलें?
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को लगाई कड़ी फटकार!

नई दिल्ली: अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। चेक बाउंस से जुड़े पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के निर्देशों के बावजूद तय रकम जमा नहीं करने पर उन्हें कड़ी फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उनके रवैये पर नाराजगी जताते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की और साफ संकेत दिया कि अब भुगतान में किसी तरह की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अहंकार को उसकी सही जगह दिखानी होगी और यह पता होना चाहिए कि कब बोलना है। अदालत ने यहां तक कहा कि उनकी जगह जेल में है। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल उन्हें एक और अवसर देते हुए तय समय के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है।

5 करोड़ रुपये जमा करने का था निर्देश

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले राजपाल यादव को बकाया रकम जमा करने के लिए समय दिया था। अदालत ने उन्हें 5 अक्टूबर तक 5 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद रकम जमा नहीं की गई। सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील की ओर से 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी अदालत के सामने रखी गई। इस पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा कि क्या यह डिमांड ड्राफ्ट वास्तव में मौजूद है और रकम जमा हुई भी है या नहीं।

कोर्ट में ‘फोटोकॉपी’ पर भी उठे सवाल

आपको बता दें कि राजपाल यादव के वकील ने बताया कि डिमांड ड्राफ्ट बैंक में प्रक्रिया में है और जल्द दिल्ली पहुंच जाएगा। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कागज या आश्वासन दिखाने से भुगतान की शर्त पूरी नहीं मानी जा सकती। शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने भी अभिनेता के रवैये पर आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि राजपाल यादव बार-बार अदालत के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं।

‘शिकायतकर्ता अमीर है तो क्या हुआ?’

गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान जब अभिनेता की ओर से यह दलील दी गई कि शिकायतकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हैं, तो अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। जस्टिस बागची ने कहा कि कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से अधिक संपन्न हो सकता है, लेकिन जिस रकम से उसे नुकसान हुआ है, उस सीमा तक वह पीड़ित है। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि मामले में शिकायतकर्ता को उसकी बकाया रकम मिलना महत्वपूर्ण है।

2010 में फिल्म के लिए लिया गया था पैसा

यह विवाद करीब 16 साल पुराना है। मामला राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है। आरोप के मुताबिक, वर्ष 2010 में फिल्म के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद ली गई थी। बाद में रकम लौटाने को लेकर समझौते हुए और भुगतान के लिए चेक जारी किए गए। लेकिन भुगतान के लिए जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और लंबे कानूनी विवाद के बाद राजपाल यादव के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई थी जेल की सजा

विदित है कि इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में सातों मामलों में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। सभी सजाएं साथ चलने का आदेश दिया गया था। इसके बाद राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तत्काल सरेंडर करने से अंतरिम राहत दी, लेकिन इसके साथ भुगतान की शर्त भी रखी गई। अब इसी शर्त का पालन नहीं होने पर अदालत का रुख बेहद सख्त नजर आया है।

आज तक में करना होगा भुगतान

सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को फिलहाल आखिरी मौका दिया है। अदालत ने निर्देश दिया है कि निर्धारित रकम की भुगतान प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजपाल यादव तय समय में भुगतान कर पाते हैं या नहीं और अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट उनके खिलाफ क्या रुख अपनाता है। कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अभिनेता पर गिरफ्तारी और जेल जाने का खतरा बढ़ गया है।

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