नई दिल्ली: SIR को लेकर जारी विवाद और चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के बीच आयोग ने अपने कामकाज में कई अहम बदलावों का ऐलान किया है। 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग ने नौ महत्वपूर्ण फैसले जारी किए। इनमें बैठकों की प्रक्रिया, अधिकारियों के निर्देश, विदेश यात्राएं, IT सिस्टम और मतदाता डेटा की जांच से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
अब बैठक से पहले एजेंडा, बाद में तैयार होगा रिकॉर्ड
आपको बता दें कि नए फैसले के मुताबिक आयोग की हर बैठक से पहले सभी सदस्यों को एजेंडा उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक में लिए गए फैसलों का रिकॉर्ड यानी मिनट्स भी तैयार किया जाएगा। इससे निर्णय प्रक्रिया को दस्तावेजी रूप देने और बाद में उसकी समीक्षा करने की व्यवस्था मजबूत होगी। यह बदलाव ऐसे समय आया है जब द इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं।
ECINet की होगी समीक्षा, IIT/IIIT विशेषज्ञ भी जुड़ेंगे
गौरतलब है कि आयोग ने अपने डिजिटल सिस्टम ECINet की समीक्षा का भी फैसला किया है। इसके लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी और इसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल किया जाएगा। मतदाता डेटा और चुनावी IT सिस्टम की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने मतदाता सूची के डेटा और सिस्टम का स्वतंत्र विशेषज्ञों से ऑडिट कराने की बात भी कही है।
नए IT पोर्टल-मॉड्यूल की भी होगी जांच
विदित है कि अब कोई नया IT पोर्टल या मॉड्यूल लागू करने से पहले संबंधित अधिकारियों की समिति उसकी समीक्षा करेगी। इसके अलावा फील्ड अधिकारियों को उनके काम से संबंधित सिस्टम तक आवश्यक पहुंच उपलब्ध कराने की बात कही गई है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयुक्तों की ओर से दिए गए निर्देशों का अधिकारियों को पालन करना होगा।
विदेश यात्रा के लिए भी मंजूरी जरूरी
आयोग के अधिकारियों की विदेश यात्राओं को लेकर भी नया प्रावधान किया गया है। संबंधित अधिकारियों को विदेश जाने से पहले चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी।
SIR पर आयोग ने क्या कहा?
SIR को लेकर आयोग ने कहा है कि इससे संबंधित फैसले तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति से लिए गए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान जिन पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची में नहीं आ पाए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। Form-6 को लेकर भी आयोग ने अपना पक्ष रखा है। आयोग के अनुसार गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण के लिए निर्धारित Form-6 का इस्तेमाल किया जाएगा।
राजनीतिक विवाद भी तेज
इन फैसलों के बीच कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई या इस्तीफे की मांग की है। दूसरी ओर आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच अपनी प्रक्रिया और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर स्पष्टीकरण दिया है।
फिलहाल आयोग के नौ फैसलों से यह साफ है कि बैठकों की प्रक्रिया, IT सिस्टम की समीक्षा और मतदाता डेटा की निगरानी को लेकर आने वाले समय में कामकाज पहले की तुलना में अधिक औपचारिक और दस्तावेजी बनाया जाएगा।