नई दिल्ली : यूट्यूबर एल्विश यादव को चर्चित स्नेक वेनम केस में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज FIR को रद्द करते हुए कहा कि मामला कानूनी कसौटी पर टिक नहीं सकता।
क्या था पूरा मामला?
आपको बता दें कि नवंबर 2023 में नोएडा में कथित रेव पार्टियों में सांपों और उनके जहर के इस्तेमाल के आरोप लगे। इसके बाद:
•एल्विश यादव समेत कई लोगों पर केस दर्ज हुआ
•मार्च 2024 में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया
•NDPS एक्ट और वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई हुई
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की FIR?
गौरतलब है कि न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनवाई में कई अहम बातें कहीं
1. NDPS एक्ट लागू ही नहीं होता
जिस पदार्थ को ‘साइकोट्रॉपिक’ बताया गया, वह NDPS एक्ट की सूची में शामिल नहीं था। इसलिए इस कानून का इस्तेमाल गलत माना गया
2. कोई सीधी बरामदगी नहीं
एल्विश यादव के पास से कोई ड्रग या पदार्थ बरामद नहीं हुआ चार्जशीट में सिर्फ यह आरोप था कि उन्होंने किसी सहयोगी के जरिए ऑर्डर दिया। कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना
3. वन्यजीव कानून की प्रक्रिया का पालन नहीं
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 55 के अनुसार केस सिर्फ अधिकृत अधिकारी की शिकायत पर दर्ज हो सकता है। लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। FIR को कानूनी रूप से दोषपूर्ण माना गया
4. IPC के आरोप भी टिके नहीं
IPC के तहत लगाए गए आरोप पहले की बंद हो चुकी शिकायत से जुड़े थे इसलिए वे स्वतंत्र रूप से साबित नहीं हो सके
कोर्ट ने क्या साफ किया?
विदित है कि FIR रद्द करने का फैसला केवल कानूनी कमियों के आधार पर है कोर्ट ने यह नहीं कहा कि आरोप सही हैं या गलत यानी जांच दोबारा शुरू हो सकती है
अगर सही प्रक्रिया अपनाई जाए।
पिछली सुनवाई में सख्त टिप्पणी
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि “अगर लोकप्रिय लोग सांपों का इस तरह इस्तेमाल करेंगे तो समाज में गलत संदेश जाएगा” कोर्ट ने पशु संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता जताई थी
एल्विश की तरफ से क्या दलील दी गई?
विदित है कि उनके वकील ने कहा कि वह सिर्फ वीडियो शूट के लिए गए थे। रेव पार्टी के ठोस सबूत नहीं हैं। कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ और लैब रिपोर्ट में सांप विषैले नहीं थे।
अब आगे क्या?
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर अधिकारी चाहें तो सही कानूनी प्रक्रिया अपनाकर नई शिकायत दर्ज की जा सकती है
यह फैसला सिर्फ एक केस नहीं पुलिस जांच की प्रक्रिया और NDPS और वन्यजीव कानून के इस्तेमाल दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। फिलहाल, एल्विश यादव को बड़ी राहत मिल चुकी है लेकिन कहानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।