दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल-सिसोदिया समेत 23 लोग बाइज्जत बरी!: CBI की जांच पर उठे गंभीर सवाल, 598 पेज के आदेश में कोर्ट...जानें पूरा मामला और इस फैसले का राजनीतिक-कानूनी असर_एक नजर
दिल्ली शराब नीति मामले में केजरीवाल-सिसोदिया समेत 23 लोग बाइज्जत बरी!

 

नई दिल्ली : दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला देश की राजनीति और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा असर डालने वाला साबित हुआ है। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने अपने 598 पेज के विस्तृत आदेश में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट और पूरक आरोपपत्रों को खारिज करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि हजारों पन्नों की जांच के बावजूद कोई ठोस सबूत, वित्तीय लेन-देन या आपराधिक साजिश का प्रमाण पेश नहीं किया जा सका।

कोर्ट की सबसे बड़ी टिप्पणी: “चार्जशीट में अपराध का एक भी ठोस प्रमाण नहीं”

आपको बता दें कि जज जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा कि:

CBI की मुख्य चार्जशीट (24 नवंबर 2022) और चार पूरक चार्जशीट में आरोप अनुमान और धारणाओं पर आधारित थे।

प्रस्तुत दस्तावेज और गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते।

रिश्वत की मांग या स्वीकार करने का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला।

किसी भी आरोपी के खिलाफ फाइनेंशियल ट्रेल या मनी लिंक साबित नहीं हुआ।

अदालत ने यह भी कहा कि नीति से जुड़े फैसले सामूहिक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थे, न कि किसी एक व्यक्ति द्वारा व्यक्तिगत लाभ के लिए लिए गए निर्णय।

CBI की जांच पर गंभीर सवाल, अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश

गौरतलब है कि इस मामले में कोर्ट की सबसे कड़ी टिप्पणी CBI की जांच पद्धति पर रही। जज ने कहा कि जांच अंतर्विरोधों और असंगतियों से भरी हुई है। कई दस्तावेज और बयान तथ्यों से मेल नहीं खाते। जांच एजेंसी ने पूर्वाग्रहपूर्ण शब्दों और अपूर्ण तथ्यों का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने खास तौर पर जांच अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करते हुए कहा कि ऐसी जांच न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।

‘साउथ ग्रुप’ शब्द पर कोर्ट की सख्त नाराजगी :

विदित है कि CBI ने अपनी चार्जशीट में कथित आरोपियों के लिए “साउथ ग्रुप” शब्द का इस्तेमाल किया था। इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि - “ऐसे शब्द पूर्वाग्रह पैदा करते हैं और निष्पक्ष जांच के सिद्धांत के खिलाफ हैं।” जज ने सवाल किया कि क्या यह शब्द किसी आधिकारिक परिभाषा का हिस्सा था या सिर्फ आरोपियों को एक खास छवि देने के लिए इस्तेमाल किया गया।

लंबी जेल, लेकिन साबित नहीं हुआ अपराध :

आपको बता दें कि अदालत ने इस बात का भी उल्लेख किया कि मनीष सिसोदिया करीब 530 दिन जेल में रहे। अरविंद केजरीवाल दो चरणों में कुल 156 दिन हिरासत में रहे। इसके बावजूद जांच एजेंसी आरोप साबित करने में विफल रही, जिसे अदालत ने गंभीर चिंता का विषय बताया।

केजरीवाल का नाम बाद में जोड़ने पर भी सवाल :

गौरतलब है कि बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि केजरीवाल का नाम शुरुआती चार्जशीट में नहीं था, बल्कि बाद की पूरक चार्जशीट में जोड़ा गया। अदालत ने इस तथ्य को भी नोट किया और कहा कि नाम जोड़ने के पीछे ठोस प्रमाण का अभाव दिखाई देता है।

क्या था पूरा आबकारी नीति मामला :

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली सरकार ने 2021-22 में नई शराब नीति लागू की थी, जिसका उद्देश्य शराब कारोबार में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना बताया गया था। बाद में इस नीति में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे और उपराज्यपाल की सिफारिश पर CBI ने अगस्त 2022 में मामला दर्ज किया। इसके बाद ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच शुरू की, जिससे मामला राष्ट्रीय स्तर का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया।

23 आरोपी हुए आरोपमुक्त

इस फैसले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 लोगों को आरोपमुक्त किया गया। अदालत ने कहा कि मामला ट्रायल चलाने लायक भी नहीं बनता, क्योंकि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए।

फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी असर :

गौरतलब है कि इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे “सत्य की जीत” बताया। वहीं CBI सूत्रों ने संकेत दिया है कि एजेंसी उच्च अदालत में इस फैसले को चुनौती दे सकती है।

यह फैसला न सिर्फ इस मामले का महत्वपूर्ण मोड़ है, बल्कि जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी नई बहस छेड़ सकता है।

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