नई दिल्ली : देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी खबर है। 1 अप्रैल 2026 से आयकर के नए नियम लागू होने जा रहे हैं, जो आपकी सैलरी से लेकर गिफ्ट और कंपनी की सुविधाओं तक सब कुछ बदल देंगे। सरकार ने Income Tax Rules 2026 का ड्राफ्ट जारी किया है, जो पुराने 1961 वाले कानून की जगह नए सिस्टम को लागू करेगा। ये बदलाव सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं इसका असर आपकी टेक होम सैलरी, फॉर्म-16 और टैक्स कैलकुलेशन पर पड़ेगा। देखें होने वाले प्रमुख 10 बदलाव कौन-कौन से हैं।
सबसे बड़ा बदलाव: अब ‘फ्री सुविधाएं’ भी टैक्स के दायरे में
आपको बता दें कि अब तक जो चीजें “फ्री” लगती थीं, अब उन पर भी टैक्स लगेगा -
कंपनी का घर
कंपनी की कार
गिफ्ट और वाउचर
रिटायरमेंट फंड
यानी अब “पर्क्स” यानी मिलने वाली सुविधाएं और गिफ्ट भी आपकी इनकम मानी जाएंगी।
रिटायरमेंट फंड पर बड़ा झटका
गौरतलब है कि अगर आपकी कंपनी PF, NPS और अन्य फंड में ₹7.5 लाख से ज्यादा योगदान करती है तो उस अतिरिक्त राशि पर टैक्स लगेगा और उस पर मिलने वाला ब्याज भी टैक्सेबल होगा।
कंपनी का घर: कितना लगेगा टैक्स? अब शहर की आबादी तय करेगी
गौरतलब है कि अगर आपको कंपनी की ओर से रहने के लिए घर मिलता है, तो उसका टैक्सेबल वैल्यू अब पूरी तरह से शहर की आबादी पर निर्भर करेगा।
•महानगर (40 लाख से अधिक आबादी): आपके मूल वेतन का 10% टैक्सेबल माना जाएगा।
•बड़े शहर (15-40 लाख आबादी): वेतन का 7.5%।
•छोटे शहर (15 लाख से कम): वेतन का 5%।
अच्छी बात यह है कि अगर आप कंपनी को इस घर के बदले में कुछ किराया देते हैं, तो यह रकम इस टैक्सेबल वैल्यू से घटा दी जाएगी। यानी घर मिला तो टैक्स भी देना पड़ेगा
किराए के मकान पर अलग नियम
अगर कंपनी खुद किराए पर घर लेकर आपको देती है, तो टैक्स कैलकुलेशन का तरीका थोड़ा अलग होगा। ऐसे में, कंपनी द्वारा चुकाया गया किराया या आपके वेतन का 10%—इनमें से जो भी कम होगा, उसे ही टैक्सेबल वैल्यू माना जाएगा।
कंपनी की कार: अब हर महीने तय रकम से कटेगा टैक्स
ऑफिस की गाड़ी का इस्तेमाल ऑफिस और निजी काम दोनों के लिए करते हैं? अब इस सुविधा की एक फिक्स कीमत तय कर दी गई है।
•1.6 लीटर तक के इंजन वाली कार: हर महीने 5,000 रुपये आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ेंगे।
•1.6 लीटर से बड़े इंजन वाली कार: हर महीने 7,000 रुपये जुड़ेंगे।
•ड्राइवर की सुविधा: अगर कंपनी ड्राइवर भी दे रही है, तो हर महीने 3,000 रुपये अतिरिक्त जुड़ेंगे।
गिफ्ट पर भी लगेगा टैक्स!
गौरतलब है कि अब ₹15,000 तक का गिफ्ट ही टैक्स-फ्री रहेगा। इससे ज्यादा पर पूरा अमाउंट टैक्सेबल होगा। त्योहारों के गिफ्ट भी अब टैक्स के दायरे में होगा।
टैक्स-फ्री इनकम पर खर्च: अब 1% का नियम
अगर आप कोई ऐसा निवेश करते हैं, जिससे मिलने वाली आय पर टैक्स छूट है (जैसे डिविडेंड), तो उस निवेश से जुड़े खर्चों को क्लेम करना अब आसान हो गया है। नियम कहता है कि ऐसे निवेश की सालाना औसत वैल्यू का 1% खर्च मान लिया जाएगा। हालांकि, यह रकम आपके द्वारा किए गए असल खर्च से ज्यादा नहीं हो सकती।
खाने और लोन पर भी नियम
आपको बता दें कि ऑफिस में ₹200 तक का खाना टैक्स-फ्री रहेगा। कंपनी से सस्ता लोन लिया तो उस पर भी टैक्स लग सकता है
विदेशी कंपनियों पर भी सख्ती
अगर कोई विदेशी डिजिटल कंपनी भारत से ₹2 करोड़ कमाती है या 3 लाख यूजर्स हैं तो उसे भारत में टैक्स देना होगा
सैलरी स्लिप और फॉर्म 16 में होगा बड़ा बदलाव
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन बदलावों का सीधा असर आपके फॉर्म 16 और सैलरी स्लिप पर पड़ेगा। कंपनियों को अपने पेरोल सॉफ्टवेयर और सैलरी स्ट्रक्चर को पूरी तरह अपडेट करना होगा। पर्क्स (Perks) की वैल्यू अब नए फॉर्मूले के हिसाब से दिखेगी।
टैक्सपेयर्स क्या करें?
टैक्स विशेषज्ञों की सलाह है कि नए साल (1 अप्रैल 2026) से पहले ही आप अपनी सैलरी के कंपोनेंट्स को समझ लें और अपने एम्प्लॉयर (कंपनी) से बातचीत कर लें। हो सकता है कि कंपनी आपकी टैक्स लायबिलिटी को मैनेज करने के लिए सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करे।
यह सिर्फ नया नियम नहीं, बल्कि “पूरे टैक्स सिस्टम का गेम चेंजर” है। अब हर टैक्सपेयर को समझना होगा कि कौन-सी सुविधा फ्री है और कौन-सी टैक्सेबल बन चुकी है। यह बदलाव डराने के लिए नहीं, बल्कि टैक्स सिस्टम को साफ और सरल बनाने के लिए किए गए हैं। बस जरूरत है तो इन्हें सही से समझने की है।