नई दिल्ली : दिल्ली मेट्रो से रोज़ सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए अहम खबर है। राजधानी में 21 मेट्रो स्टेशनों के नामों की समीक्षा के बाद कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं। 12 नाम यथावत रखे गए हैं, 7 में संशोधन हुआ है और 2 स्टेशनों के नाम पूरी तरह बदल दिए गए हैं। यह फैसला दिल्ली की मुख्यमंत्री और राज्य नाम प्राधिकरण (SNA) की अध्यक्ष रेखा गुप्ता की अगुवाई में लिया गया। प्रस्तावित नामों की समीक्षा Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के आधार पर की गई।
क्यों बदले गए नाम?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने कहा कि मेट्रो स्टेशन सिर्फ आवागमन का साधन नहीं होते, बल्कि वे उस क्षेत्र की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को भी दर्शाते हैं। इसलिए हर नाम पर विस्तार से चर्चा और तथ्यात्मक जांच के बाद ही निर्णय लिया गया। नाम बदलते समय स्थानीय पहचान, ऐतिहासिक व सामाजिक महत्व, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के सुझाव और यात्रियों को दिशा समझने में सुविधा बातों का ध्यान रखा गया।
12 स्टेशन जिनके नाम नहीं बदले :
मजलिस पार्क, भलस्वा, हैदरपुर बादली मोड़, दीपाली चौक, यमुना विहार, भजनपुरा, खजूरी खास, सूरघाट, झड़ौदा माजरा, बुराड़ी, पुष्पांजलि और मौजपुर-बाबरपुर।
इन नामों को क्षेत्रीय पहचान के अनुरूप सही माना गया।
इन 7 स्टेशनों के नामों में आंशिक संशोधन :
विदित है कि यात्रियों को बेहतर लोकेशन पहचान दिलाने के लिए आसपास के प्रमुख क्षेत्रों के नाम जोड़े गए:
●उत्तरी पीतमपुरा–प्रशांत विहार (पहले: प्रशांत विहार)
●जगतपुर–वजीराबाद (पहले: जगतपुर)
●नानक प्याऊ–डेरावल नगर (पहले: डेरावल नगर)
●खानपुर–वायुसैनाबाद (पहले: खानपुर)
●नानकसर–सोनिया विहार (पहले: सोनिया विहार)
●श्री राम मंदिर मयूर विहार (पहले: मयूर विहार पॉकेट-1)
●मंगोलपुर कलां–वेस्ट एन्क्लेव (पहले: वेस्ट एन्क्लेव)
2 स्टेशनों के नाम पूरी तरह बदले :
●हैदरपुर गांव (पहले: नॉर्थ पीतमपुरा)
●मधुबन चौक (पीतमपुरा)
इन बदलावों में स्थानीय लोगों की मांग और क्षेत्रीय वास्तविकता को प्राथमिकता दी गई।
नाम बदलने का अधिकार किसके पास?
गौरतलब है कि दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों जैसे सड़क, पार्क, कॉलोनी, इमारत और मेट्रो स्टेशन के नामकरण या पुनः नामकरण का अधिकार State Names Authority (SNA) के पास है। यह प्राधिकरण शहरी विकास विभाग के तहत काम करता है। इसमें 29 सदस्य होते हैं, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं और मुख्य सचिव इसके उपाध्यक्ष होते हैं। हर प्रस्ताव की समीक्षा के बाद अंतिम मंजूरी दी जाती है।
यात्रियों पर क्या असर पड़ेगा?
मेट्रो रूट या सेवा में कोई बदलाव नहीं होगा। सिर्फ स्टेशन के नाम अपडेट होंगे। मैप, अनाउंसमेंट और साइनबोर्ड में नए नाम दिखेंगे
अब आगे क्या?
सरकार का कहना है कि भविष्य में अगर किसी क्षेत्र से तर्कसंगत और जनहित आधारित प्रस्ताव आता है, तो नियमों के तहत उस पर भी विचार किया जाएगा।
दिल्ली मेट्रो के स्टेशनों के नामों में यह बदलाव सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि स्थानीय पहचान को मजबूत करने की कोशिश बताया जा रहा है। अब देखना होगा कि यात्री इन नए नामों को कितनी जल्दी अपनाते हैं।