नई दिल्ली : राजधानी की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में अब किताब-कॉपी से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर शुरू हो गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरोजिनी नगर स्थित सीएम श्री स्कूल का उद्घाटन कर उस मॉडल की शुरुआत कर दी, जिसे सरकार देश का पहला AI-संचालित समग्र शिक्षा मॉडल बता रही है। योजना के तहत सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि दिल्ली में 75 सीएम श्री स्कूलों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा और दावा है कि यहां पढ़ने वाले बच्चे सीधे वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे।
7000 क्लासरूम बनेंगे स्मार्ट, पढ़ाई अब ‘एक जैसी’ नहीं :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार का सबसे बड़ा कदम 31 मार्च तक 7000 कक्षाओं को AI-सक्षम स्मार्ट क्लासरूम में बदलना है। अब क्लासरूम में इंटरैक्टिव स्मार्ट बोर्ड, डिजिटल कंटेंट आधारित पढ़ाई और हर छात्र के स्तर के हिसाब से अलग-अलग सीखने की व्यवस्था के साथ रियल-टाइम प्रोग्रेस ट्रैकिंग की व्यवस्था की जाएगी। यानी एक ही क्लास में बैठकर भी हर बच्चे को अलग-अलग तरीके से पढ़ाया जाएगा। कमजोर छात्र को बेसिक समझ, तेज छात्र को एडवांस कॉन्सेप्ट सिखाया जाएगा।
सरकारी स्कूल से ही IIT-NEET की तैयारी :
गौरतलब है कि सबसे बड़ा बदलाव प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर किया गया है। अब छात्रों को कोचिंग के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। सरकारी स्कूलों में ही JEE, NEET, CUET, CLAT और NDA जैसे एग्जाम की तैयारी कराई जाएगी। इसके लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल पोर्टल बनाया जा रहा है। जो नियमित टेस्ट सिस्टम और प्रदर्शन मॉनिटरिंग का कार्य करेगा। यानी स्कूल में पढ़ाई, कोचिंग और करियर गाइडेंस तीनों एक जगह होगा।
रोबोटिक्स, AI और मेकाट्रॉनिक्स भी पढ़ेंगे बच्चे :
विदित है कि नई शिक्षा व्यवस्था में सिर्फ किताबें नहीं होंगी, बल्कि कौशल आधारित पढ़ाई होगी।
आने वाली सुविधाएं:
●मल्टी-सेक्टोरियल स्किल लैब
●रोबोटिक्स और AI प्रोजेक्ट
●डिजाइन और मेकाट्रॉनिक्स प्रशिक्षण
●175 नई ICT लैब्स (लगभग 7000 कंप्यूटर)
●100+ डिजिटल लाइब्रेरी
●175+ लैंग्वेज लैब
●विदेशी भाषाएं सीखने का भी मौका मिलेगा ताकि छात्र अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से जुड़ सकें।
पहली बार सरकारी स्कूलों में अनिवार्य इंटर्नशिप :
आपको बता दें कि अब पढ़ाई सिर्फ क्लास तक सीमित नहीं रहेगी। उद्योगों के साथ मिलकर छात्रों को अनिवार्य इंटर्नशिप कराई जाएगी। साथ ही करियर लैब में रुचि और क्षमता का परीक्षण, मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास और नैतिक शिक्षा और लाइफ स्किल्स को बढ़ावा दिया जाएगा। यानी लक्ष्य सिर्फ पास कराना नहीं करियर बनाना है।
सरकार का दावा; निजी स्कूल जैसा स्तर :
सरकार का कहना है कि अब गरीब, सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को भी वही सुविधाएं मिलेंगी जो बड़े निजी स्कूलों में मिलती हैं। यह मॉडल केवल रिजल्ट सुधारने के लिए नहीं बल्कि छात्रों को IIT, मेडिकल कॉलेज विदेशी विश्वविद्यालय, स्टार्टअप और उद्यमिता तक पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।
क्या बदल जाएगा?
अगर योजना सफल हुई तो पहली बार सरकारी स्कूल डिग्री देने वाली जगह नहीं, बल्कि भविष्य बनाने वाली जगह बन जाएंगे, जहां छात्र किताब से नहीं, टेक्नोलॉजी से सीखेंगे और स्कूल से निकलते ही करियर की दिशा तय होगी।