नई दिल्ली : खेती-किसानी से जुड़े करोड़ों किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के नियमों में अहम बदलाव का प्रस्ताव आया है। अब KCC की वैधता 5 साल के बजाय 6 साल तक होगी। यानी किसानों को बार-बार नवीकरण के लिए बैंक के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और कर्ज चुकाने के लिए भी ज्यादा समय मिलेगा। यह प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मसौदे में सामने आया है, जिस पर 6 मार्च तक सुझाव मांगे गए हैं। अगर यह नियम लागू हो जाता है तो खेती की लागत के अनुसार ऋण सीमा भी बढ़ेगी।
क्या-क्या बदलने वाला है?
1. KCC की अवधि बढ़ेगी
आपको बता दें कि पहले किसान क्रेडिट कार्ड 5 साल के लिए वैध होता था। अब इसे 6 साल तक मान्य करने का प्रस्ताव है। इससे किसानों को एक साल की अतिरिक्त राहत मिलेगी।
2. ऋण सीमा खेती की लागत से जुड़ेगी
गौरतलब है कि अब ऋण सीमा “स्केल ऑफ फाइनेंस” यानी फसल की वास्तविक लागत के अनुसार तय होगी। खाद, बीज, सिंचाई, मजदूरी जैसी जरूरतों को ध्यान में रखकर कर्ज दिया जाएगा।
3. ब्याज दर में राहत बरकरार
विदित है कि KCC पर 5 लाख रुपये तक का ऋण 7% ब्याज पर राहत अब भी बरकरार है। समय पर भुगतान करने पर 3% की अतिरिक्त छूट मिलेगी। यानी प्रभावी ब्याज दर सिर्फ 4% रहेगा।
4. फसल चक्र के अनुसार ऋण वापसी
●कम अवधि वाली फसल: 12 महीने में भुगतान
●लंबी अवधि वाली फसल (जैसे गन्ना, फल): 18 महीने तक समय
इससे किसान पर उस वक्त कर्ज चुकाने का दबाव नहीं होगा जब फसल बाजार में नहीं बिकी हो।
एग्री-टेक खर्च भी होगा शामिल :
आपको बता दें कि आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए KCC के दायरे को बढ़ाया गया है। अब इन खर्चों को भी मान्यता मिलेगी:
●मिट्टी परीक्षण
●मौसम पूर्वानुमान सेवाएं
●जैविक खेती प्रमाणन
●ड्रोन और स्मार्ट सिंचाई सिस्टम
यानी अब KCC सिर्फ पारंपरिक खेती नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित खेती के लिए भी मददगार होगा।
UPI और ई-रुपी से जुड़ेगा KCC
गौरतलब है कि नई व्यवस्था में KCC को UPI और CBDC (ई-रुपी) से जोड़ा जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि किसान खाद-बीज खरीदते समय सीधे मोबाइल से भुगतान कर सकेंगे। नकदी रखने का जोखिम कम होगा और लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
बिहार की तस्वीर चिंताजनक :
विदित है कि कई राज्यों में KCC का लाभ पूरी तरह किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उदाहरण के तौर पर बिहार में कुल किसान 72 लाख से अधिक हैं। लेकिन सितंबर 2025 तक लाभार्थी में सिर्फ 6,16,047 किसान शामिल रहे। वहीं 36% बैंक शाखाओं ने एक भी KCC जारी नहीं किया। वित्तीय वर्ष में 37,400 करोड़ रुपये के ऋण वितरण का लक्ष्य था, लेकिन पहली छमाही में सिर्फ 7,066 करोड़ रुपये ही बांटे गए।
क्यों है यह बदलाव अहम?
सरकार के इस बदलाव से निम्नलिखित फायदे होंगे।
●किसानों को लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा
●आधुनिक खेती को बढ़ावा
●ब्याज में राहत जारी
●डिजिटल भुगतान से पारदर्शिता
●बैंकों के चक्कर से मुक्ति**
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बैंक सक्रियता से इस योजना को लागू करें तो यह कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।
KCC के नियमों में प्रस्तावित बदलाव किसानों के लिए राहत भरी खबर है। 6 साल की वैधता, ज्यादा ऋण सीमा और फसल चक्र के अनुसार भुगतान जैसी सुविधाएं खेती को आर्थिक मजबूती दे सकती हैं। अब नजर इस बात पर है कि यह मसौदा कब लागू होता है और जमीनी स्तर पर इसका लाभ कितनी तेजी से किसानों तक पहुंचता है।