कहीं आपकी जासूसी तो नहीं कर रही आपकी स्मार्ट कार!: 8 लाख ग्राहकों के ऐड्रेस-कॉल डिटेल्स समेत कई जानकारियों के डेटा लीक ने बढ़ाई ग्राहकों की चिंता...बरतें ये सावधानियां?
कहीं आपकी जासूसी तो नहीं कर रही आपकी स्मार्ट कार!

सुरक्षा : आजकल आधुनिक कारें सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं रह गई हैं। इंटरनेट कनेक्शन, स्मार्टफोन ऐप, जीपीएस और ऑनलाइन सुविधाओं ने इन्हें पहले से ज्यादा स्मार्ट बना दिया है। लेकिन यही तकनीक आपकी निजता के लिए खतरा भी बन सकती है। कार की डिजिटल सेवाओं में मौजूद सुरक्षा खामियों के कारण घर का पता, यात्रा का विवरण और दूसरी निजी जानकारियां गलत हाथों में पहुंच सकती हैं। एक नए अध्ययन ने कनेक्टेड कारों की साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कारों की सुरक्षा में कहां रह गई कमी?

आपकों बता दें कि स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय और चाल्मर्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़े शोधकर्ताओं ने कारों की साइबर सुरक्षा से संबंधित खामियों का अध्ययन किया। उनके विश्लेषण में सामने आया कि खतरा केवल कार के अंदर लगे कंप्यूटर सिस्टम तक सीमित नहीं है। कार से जुड़ी मोबाइल ऐप, क्लाउड सेवाएं और बाहरी डिजिटल प्लेटफॉर्म भी साइबर हमले का रास्ता बन सकते हैं। अध्ययन में वर्ष 2022 से सितंबर 2024 के बीच दर्ज 413 सुरक्षा खामियों का विश्लेषण किया गया। इसकी तुलना वर्ष 2010 से 2019 के दौरान किए गए पहले के अध्ययन से भी की गई। पुराने विश्लेषण में बाहरी ऐप और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ी खामियों की हिस्सेदारी लगभग सातवां हिस्सा थी। नए अध्ययन में यह बढ़कर करीब 40 प्रतिशत हो गई। इसका मतलब है कि कारों से जुड़ी बाहरी डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, ये आंकड़े दर्ज की गई सुरक्षा खामियों के विश्लेषण पर आधारित हैं, न कि सभी कारों में मौजूद खतरों के अनुपात पर।

घर का पता और सफर की जानकारी हो सकती है उजागर

गौरतलब है कि आधुनिक कारों में इस्तेमाल होने वाले जीपीएस और ऑनलाइन सिस्टम कई तरह की जानकारियां जुटा सकते हैं। इनमें कार की लोकेशन, यात्रा का समय, संपर्क संबंधी विवरण और वाहन के इस्तेमाल से जुड़ा डेटा शामिल हो सकता है। अगर इन जानकारियों को सुरक्षित रखने वाली प्रणाली में कमजोरी हो, तो साइबर अपराधी निजी जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। इससे किसी व्यक्ति की रोजमर्रा की गतिविधियों और आने-जाने के स्थानों का पता चलने का जोखिम पैदा हो सकता है। इसलिए कार की सुरक्षा का मतलब केवल चोरी रोकना या दुर्घटना से बचाव करना नहीं रह गया है। अब डिजिटल गोपनीयता भी उतनी ही जरूरी हो गई है।

फॉक्सवैगन डेटा लीक ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट में वर्ष 2024 में सामने आए फॉक्सवैगन से जुड़े डेटा लीक का भी उल्लेख किया गया है। इस घटना में करीब 8 लाख ग्राहकों की लोकेशन यानी पता और संपर्क संबंधी जानकारी उजागर होने की बात सामने आई थी। बताया गया कि एक बाहरी सेवा प्रदाता के क्लाउड सिस्टम में लॉगिन संबंधी सुरक्षा चूक के कारण डेटा तक पहुंच संभव हुई। यह मामला दिखाता है कि वाहन निर्माता की अपनी व्यवस्था के अलावा उससे जुड़ी दूसरी कंपनियों की सुरक्षा भी ग्राहकों की निजता के लिए अहम है।

इंफोटेनमेंट सिस्टम भी बन सकता है निशाना

विदित है कि कार में लगा इंफोटेनमेंट सिस्टम संगीत, नेविगेशन और स्मार्टफोन कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं देता है। लेकिन इसमें मौजूद तकनीकी खामियां भी खतरा पैदा कर सकती हैं। वर्ष 2015 में साइबर सुरक्षा शोधकर्ता चार्ली मिलर और क्रिस वैलासेक ने जीप चेरोकी में मौजूद एक कमजोरी के जरिए कुछ परिस्थितियों में वाहन के महत्वपूर्ण नियंत्रणों तक दूर से पहुंच बनाने की संभावना प्रदर्शित की थी। अध्ययन में वर्ष 2022 की स्कोडा सुपर्ब के इंफोटेनमेंट सिस्टम की ऐसी खामी का भी उल्लेख है, जिससे कुछ परिस्थितियों में वाई-फाई के जरिए सिस्टम ठप हो सकता था।

कार मालिक कैसे रखें अपना डेटा सुरक्षित?

कार मालिकों को कंपनी की आधिकारिक ऐप इस्तेमाल करनी चाहिए और मोबाइल ऐप तथा वाहन के सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करना चाहिए। अनजान ऐप को कार से जोड़ने, संदिग्ध लिंक खोलने और अनावश्यक डेटा साझा करने से बचना चाहिए। कार बेचने से पहले उसमें सेव किए गए व्यक्तिगत डेटा और जुड़े हुए खातों को हटाना भी जरूरी है।

कनेक्टेड कारों की सुविधाएं सफर को आसान बनाती हैं, लेकिन उनके साथ डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। अध्ययन का मुख्य संदेश यही है कि कार की सुरक्षा अब केवल उसके दरवाजों के लॉक तक सीमित नहीं है; आपकी निजी जानकारी की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

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