विश्व : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक नए खतरे की आशंका पैदा कर दी है। इस बार चिंता सिर्फ मिसाइलों, सैन्य ठिकानों या तेल की सप्लाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्र के नीचे बिछे उन संचार नेटवर्क पर भी है, जिनके सहारे दुनिया का इंटरनेट चलता है। खबरों के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल दोबारा हमला करते हैं, तो खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल को निशाना बनाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इसका असर कई देशों के डिजिटल कारोबार और संचार व्यवस्था पर पड़ सकता है।
ट्रंप की चेतावनी से फिर बढ़ा युद्ध का खतरा
आपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है। फ्लोरिडा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका फिर सैन्य अभियान चला सकता है। हालांकि, उन्होंने किसी नई कार्रवाई की निश्चित तारीख या विस्तृत योजना का खुलासा नहीं किया। दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके देश के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। इसी संदर्भ में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को संभावित निशाने के तौर पर पेश किया गया है। हालांकि, केबलों को नुकसान पहुंचाने की किसी वास्तविक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
समुद्र के नीचे बिछी केबल क्यों हैं इतनी अहम?
गौरतलब है कि आज दुनिया का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबलों के सहारे इंटरनेट से जुड़ा है। ये केबल देशों के बीच डेटा पहुंचाती हैं और अंतरराष्ट्रीय कॉल, ऑनलाइन बैंकिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड सेवाओं तथा कंपनियों के डिजिटल कामकाज को संभव बनाती हैं। इन्हें इंटरनेट की अदृश्य जीवनरेखा कहा जा सकता है। उपग्रहों के जरिए भी संचार होता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट डेटा का अधिकांश हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी केबलों से गुजरता है। इसलिए इन नेटवर्कों में बड़ी बाधा आने पर कई क्षेत्रों में इंटरनेट की रफ्तार घट सकती है और डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
होर्मुज की केबलों पर खतरे की बात क्यों?
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े एक अधिकारी ने कथित तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबलों को निशाना बनाए जाने की चेतावनी दी है। इस क्षेत्र का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम समुद्री मार्ग है और इसके आसपास कई देशों का डिजिटल बुनियादी ढांचा मौजूद है। हालांकि, होर्मुज से गुजरने वाली केबलें दुनिया के कुल इंटरनेट ट्रैफिक का छोटा हिस्सा वहन करती हैं। इसलिए केवल इस क्षेत्र में केबल कटने से पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाएगा, ऐसा कहना सही नहीं होगा।
इंटरनेट बाधित हुआ तो कारोबार पर क्या पड़ेगा असर?
विदित है कि यदि एक साथ कई प्रमुख केबल क्षतिग्रस्त होती हैं, तो प्रभावित देशों में इंटरनेट धीमा पड़ सकता है। बैंकिंग लेनदेन, ऑनलाइन भुगतान, क्लाउड कंप्यूटिंग और अंतरराष्ट्रीय कारोबार में देरी हो सकती है। खाड़ी देशों में डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश को भी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इंटरनेट नेटवर्क में वैकल्पिक मार्ग मौजूद होते हैं। ट्रैफिक को दूसरी केबलों से भेजा जा सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वैकल्पिक नेटवर्क में कितनी क्षमता उपलब्ध है। युद्ध के दौरान समुद्र के नीचे केबलों की मरम्मत करना भी मुश्किल हो सकता है।
कूटनीति पर टिकी दुनिया की नजरें
विदित है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब ऊर्जा आपूर्ति के साथ डिजिटल सुरक्षा के लिए भी चिंता पैदा कर रहा है। कई देशों ने नई सैन्य कार्रवाई से बचने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है।
फिलहाल इंटरनेट केबलों पर हमले की आशंका एक चेतावनी है, कोई पुष्ट घटना नहीं। लेकिन यदि संघर्ष इस दिशा में बढ़ता है, तो इसका असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय कारोबार और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच सकता है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या हालात और बिगड़ते हैं।