राजस्थान/स्वास्थ्य : दुनिया के कई देशों में इबोला वायरस के बढ़ते खतरे के बीच भारत में भी स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। अफ्रीकी देशों में संक्रमण के मामलों के बाद अब भारत में भी संदिग्ध मरीजों की निगरानी तेज कर दी गई है। इसी बीच राजस्थान के जयपुर में इबोला का एक संदिग्ध मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है।
युगांडा से जयपुर पहुंची महिला में दिखें लक्षण :
युगांडा से जयपुर पहुंची 19 वर्षीय महिला पर्यटक में इबोला जैसे लक्षण दिखाई देने के बाद उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कर आइसोलेशन में रखा गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि अभी तक भारत में इबोला वायरस का कोई कन्फर्म केस नहीं मिला है।
जयपुर एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग में मिली संदिग्ध
जानकारी के मुताबिक युवती शारजाह के रास्ते जयपुर पहुंची थी। एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य जांच के दौरान उसकी मेडिकल स्थिति को देखते हुए उसे संदिग्ध माना गया। इसके बाद उसे राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) अस्पताल के विशेष आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज में कुछ लक्षण इबोला संक्रमण से मिलते-जुलते हैं, लेकिन सिर्फ लक्षणों के आधार पर बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
जांच के लिए पुणे भेजा गया सैंपल
आपको बता दें कि युवती के सैंपल जांच के लिए पुणे भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह इबोला संक्रमण है या नहीं। स्वास्थ्य टीम लगातार मरीज की निगरानी कर रही है। इलाज के लिए विशेष मेडिकल टीम बनाई गई है, जिसमें अलग-अलग विभागों के डॉक्टर शामिल हैं।
साथ आए यात्रियों को भी सतर्क रहने के निर्देश
गौरतलब है कि सुरक्षा को देखते हुए उस फ्लाइट में सफर करने वाले अन्य यात्रियों को भी जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें लक्षणों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल सहायता लेने को कहा है।
हैदराबाद सहित अन्य जगह भी बढ़ी निगरानी
विदित है कि इससे पहले हैदराबाद एयरपोर्ट पर भी अफ्रीकी देश से आए एक यात्री में बुखार जैसे लक्षण मिलने के बाद उसे निगरानी में रखा गया था। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी संदिग्ध मामलों की जांच और एयरपोर्ट स्क्रीनिंग को मजबूत किया गया है।
भारत में अभी इबोला का कोई कन्फर्म केस नहीं
आपको बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में अभी तक इबोला वायरस संक्रमण का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। हालांकि कांगो, युगांडा और प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने और हेल्थ हेल्पलाइन की मदद लेने की अपील की गई है।
कई देशों में क्यों बढ़ी चिंता?
अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। कुछ क्षेत्रों में बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के मामले सामने आए हैं। यह वायरस गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है।
इबोला के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
इबोला संक्रमण की शुरुआत आमतौर पर सामान्य फ्लू जैसे लक्षणों से हो सकती है। इसमें—
तेज बुखार
सिर दर्द
शरीर और मांसपेशियों में दर्द
कमजोरी
उल्टी
दस्त
जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में शरीर के अंदर रक्तस्राव और अंगों पर असर पड़ने का खतरा भी हो सकता है।
कैसे फैलता है इबोला वायरस?
इबोला मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खून या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ संक्रमित या संदिग्ध मरीजों को अलग रखने और सुरक्षा उपाय अपनाने पर जोर देते हैं।
1976 में पहली बार मिला था वायरस
इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। इसका नाम कांगो क्षेत्र की इबोला नदी के नाम पर रखा गया। तब से अलग-अलग समय पर इसके कई प्रकोप सामने आ चुके हैं।
सरकार की अपील—घबराएं नहीं, सतर्क रहें
आपको बता दें कि स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल भारत में घबराने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन सावधानी जरूरी है।
एयरपोर्ट निगरानी, संदिग्ध मरीजों की जांच और आइसोलेशन जैसी व्यवस्थाएं संक्रमण को रोकने के लिए की जा रही हैं।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट चिकित्सा शोध, जनरल जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श ज़रूर करें। NCR पत्रिका इसकी सटीकता या व्यक्तिगत असर की जिम्मेदारी नहीं लेता है।