देहरादून: उत्तराखंड के शहरों में जमीन खरीदकर होटल, दुकान, अस्पताल या कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्य सरकार ने यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन-2025 लागू कर निर्माण और जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को स्पष्ट कर दिया है। अब केवल सड़क चौड़ी होने के आधार पर आवासीय जमीन पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं मिलेगी। नए नियमों में सबसे अहम बदलाव यह है कि 40 फीट या उससे अधिक चौड़ी सड़क के सामने स्थित प्लॉट को सिर्फ सड़क की चौड़ाई के आधार पर कॉमर्शियल नहीं माना जाएगा। निर्माण की अनुमति देने से पहले मास्टर प्लान और जोनल प्लान में जमीन का निर्धारित लैंडयूज देखा जाएगा।
40 फीट सड़क वाला पुराना फॉर्मूला बदला
आपको बता दें कि पहले कई मामलों में 40 फीट या उससे ज्यादा चौड़ी सड़क को कॉमर्शियल निर्माण की अनुमति से जोड़कर देखा जाता था। यदि आवासीय क्षेत्र में प्लॉट के सामने सड़क निर्धारित चौड़ाई की होती थी तो कॉमर्शियल नक्शा पास होने की संभावना बन जाती थी। अब यह व्यवस्था बदल गई है। उदाहरण के लिए, अगर किसी आवासीय कॉलोनी में आपके प्लॉट के सामने 40 या 50 फीट चौड़ी सड़क है और आप वहां होटल या दुकान बनाना चाहते हैं, तो सिर्फ सड़क की चौड़ाई पर्याप्त नहीं होगी। सबसे पहले यह जांच होगी कि मास्टर प्लान में उस जमीन का लैंडयूज किस श्रेणी में दर्ज है।
होटल-अस्पताल के लिए कॉमर्शियल लैंडयूज जरूरी
गौरतलब है कि नए नियमों के अनुसार होटल, अस्पताल, कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए संबंधित जमीन का कॉमर्शियल लैंडयूज होना जरूरी होगा। साथ ही उस क्षेत्र में लागू अन्य निर्माण मानकों को भी पूरा करना होगा। इसका असर उन इलाकों पर ज्यादा पड़ सकता है जहां मुख्य सड़कों के किनारे धीरे-धीरे आवासीय कॉलोनियां व्यावसायिक क्षेत्रों में बदल रही हैं।
152 तरह की गतिविधियों की श्रेणी तय
यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन में मास्टर प्लान के अनुरूप कुल 152 गतिविधियों को अलग-अलग श्रेणियों में शामिल किया गया है। इनमें आवासीय योजना, कृषि, पार्क, पशुपालन, आंगनबाड़ी, आश्रम, सभागार, बैंक्वेट हॉल, बर्ड सेंचुरी, बॉटनिकल गार्डन, बोर्डिंग हाउस, ईंट भट्ठा, कब्रिस्तान, बस स्टैंड और कॉलेज जैसी गतिविधियां शामिल हैं। यानी किसी जमीन पर निर्माण शुरू करने से पहले यह देखना जरूरी होगा कि संबंधित जोन में वह गतिविधि अनुमन्य है या नहीं।
शासन की मंजूरी की भूमिका भी बढ़ी
विदित है कि नए रेगुलेशन में कुछ निर्माण मामलों में मंजूरी की प्रक्रिया भी बदली गई है। विशेष अनुमति वाले मामलों में शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। विकास प्राधिकरणों के स्तर पर मिलने वाली मंजूरियों को सीमित किया गया है। शासन स्तर पर भी नगर नियोजन की संस्तुति के बाद फैसला लिया जाएगा।
प्लॉट खरीदने से पहले इन बातों की करें जांच
नई व्यवस्था के बाद जमीन खरीदने वालों के लिए सावधानी और जरूरी हो गई है। प्लॉट खरीदने से पहले मास्टर प्लान में उसका लैंडयूज, संबंधित जोन और वहां अनुमन्य गतिविधियों की जानकारी जांचनी चाहिए। अगर जमीन खरीदने का उद्देश्य होटल, अस्पताल, दुकान या कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाना है तो केवल सड़क की चौड़ाई देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। संबंधित विकास प्राधिकरण या नगर नियोजन रिकॉर्ड से यह पुष्टि करना जरूरी होगा कि प्रस्तावित निर्माण वहां नियमों के मुताबिक किया जा सकता है या नहीं।
आवास सचिव आर. राजेश कुमार के मुताबिक, नए रेगुलेशन का उद्देश्य शहरों में निर्माण व्यवस्था को मास्टर प्लान के अनुरूप व्यवस्थित करना और अवैध निर्माण पर रोक लगाने की व्यवस्था को मजबूत करना है।