हल्द्वानी/नैनीताल: बाबा नीम करौली के प्रसिद्ध धाम कैंचीधाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। पहाड़ों में बढ़ते ट्रैफिक और कैंचीधाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए काठगोदाम से कैंचीधाम तक करीब 21 किलोमीटर लंबा रोपवे नेटवर्क विकसित करने की तैयारी तेज कर दी गई है। अगर यह परियोजना जमीन पर उतरती है तो सड़क मार्ग से लगने वाला कई घंटे का सफर काफी कम हो सकता है।
3-4 घंटे का सफर करीब 1 घंटे में
आपको बता दें कि कैंचीधाम पहुंचने के लिए सड़क मार्ग पर अक्सर ट्रैफिक और जाम के कारण यात्रियों को परेशानी होती है। खासकर छुट्टियों और धार्मिक आयोजनों के दौरान काठगोदाम, ज्योलीकोट और कैंचीधाम के बीच यातायात का दबाव बढ़ जाता है। प्रस्तावित रोपवे नेटवर्क तैयार होने के बाद काठगोदाम से कैंचीधाम तक का सफर करीब एक घंटे में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे यात्रियों को पहाड़ी सड़कों के लंबे सफर और जाम से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
अब दो कॉरिडोर में तैयार होगा रोपवे नेटवर्क
गौरतलब है कि शुरुआत में रानीबाग से नैनीताल तक करीब 11.45 किलोमीटर लंबे रोपवे का प्रस्ताव था। इसकी अनुमानित लागत करीब 1,000 करोड़ रुपये बताई गई थी। अब परियोजना का दायरा बढ़ाकर इसे अलग-अलग कॉरिडोर में विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्तावित नेटवर्क में एक मार्ग काठगोदाम से ज्योलीकोट होते हुए हनुमानगढ़ी और नैनीताल तक जाने का है। वहीं दूसरे कॉरिडोर में काठगोदाम-ज्योलीकोट-सैनिटोरियम होते हुए कैंचीधाम को जोड़ा जाएगा। कैंचीधाम वाला प्रस्तावित रूट करीब 21 किलोमीटर का बताया जा रहा है।
DPR और फिजिबिलिटी रिपोर्ट पर काम जारी
विदित है कि परियोजना को कुमाऊं के इंटीग्रेटेड मोबिलिटी प्लान में शामिल किया गया है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) को इसकी नोडल एजेंसी बनाया गया है। तकनीकी सलाह के लिए फ्रांस की एक कंपनी के साथ भी करार किया गया है। फिलहाल परियोजना की व्यवहार्यता और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए भूमि चयन, स्टेशन की जगह और निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है।
जल्द हो सकती है अहम बैठक
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए हल्द्वानी में उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है। इसमें शासन के अधिकारी, कार्यदायी संस्था और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। बैठक में रोपवे के संभावित रूट, भूमि और निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
लाखों यात्री कर सकते हैं इस्तेमाल
प्रारंभिक सर्वे में इस रोपवे नेटवर्क को लेकर यात्रियों की संख्या भी काफी अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में सालाना करीब 33 लाख यात्रियों के रोपवे इस्तेमाल करने का अनुमान है। वर्ष 2030 तक यह संख्या करीब 39 लाख और 2045 तक 60 लाख से अधिक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। काठगोदाम में रोपवे का पहला टर्मिनल निर्माणाधीन हिल डिपो के आसपास बनाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
अगर योजना प्रस्ताव के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो यह रोपवे केवल कैंचीधाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा का समय कम करने वाला माध्यम नहीं होगा, बल्कि काठगोदाम, नैनीताल और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों के बीच परिवहन व्यवस्था को भी नया स्वरूप दे सकता है। हालांकि, फिलहाल यह परियोजना प्रस्ताव और DPR की प्रक्रिया में है, इसलिए अंतिम रूट, लागत और निर्माण की समयसीमा संबंधित स्वीकृतियों के बाद ही स्पष्ट होगी।