यूपी में अब घर बैठे होगा EWS सर्टिफिकेट और जमीन से जुड़े ये सारे काम!: बार-बार नहीं लगाने होंगे तहसील के चक्कर, ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया, जानें कैसे काम करेगा पूरा सिस्टम
यूपी में अब घर बैठे होगा EWS सर्टिफिकेट और जमीन से जुड़े ये सारे काम!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में राजस्व सेवाओं को लेकर योगी सरकार ने एक बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS प्रमाणपत्र बनवाने से लेकर जमीन के बंटवारे और खतौनी देखने तक की प्रक्रिया पहले से आसान और पारदर्शी होने जा रही है। राजस्व परिषद ने तीन नई डिजिटल व्यवस्थाओं की शुरुआत की है, जिससे लोगों को कागजी प्रक्रिया और बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। इनमें EWS पोर्टल, सरलीकृत खतौनी और धारा 116 के तहत भूमि विभाजन पोर्टल शामिल हैं। इन नई व्यवस्थाओं का शुभारंभ राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने किया।

EWS सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन आवेदन

आपको बता दें कि सबसे बड़ा बदलाव EWS प्रमाणपत्र को लेकर किया गया है। अब पात्र नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन लेखपाल और तहसीलदार स्तर तक डिजिटल माध्यम से भेजा और निस्तारित किया जा सकेगा। सबसे खास बात यह है कि आवेदक अपने आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकेगा। यानी फाइल कहां पहुंची, किस स्तर पर है और क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी लेने के लिए बार-बार तहसील जाने की जरूरत कम होगी। इससे कागजी काम घटने के साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी बढ़ाने की कोशिश की गई है।

खतौनी में जमीन का हिसाब होगा और सटीक

गौरतलब है कि भूमि रिकॉर्ड को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। सरलीकृत खतौनी में अब जमीन का क्षेत्रफल छह दशमलव तक दिखाया जाएगा। इससे जमीन के वास्तविक क्षेत्रफल की जानकारी अधिक सटीक तरीके से मिल सकेगी। इसके अलावा पुराने आदेशों और बंधक से जुड़े रिकॉर्ड को भी व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे जमीन के पुराने रिकॉर्ड और स्वामित्व से जुड़ी जानकारी समझना आसान हो सकता है।

जमीन का बंटवारा भी ऑनलाइन

जमीन के बंटवारे को लेकर भी लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत सह-खातेदार भूमि के विभाजन के लिए अब ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकेगा। आवेदक ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर सकेगा। नोटिस और उद्घोषणा जैसी प्रक्रियाओं की डिजिटल निगरानी भी होगी। संबंधित लेखपाल की रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। इतना ही नहीं, जमीन की वास्तविक स्थिति देखने के लिए मानचित्र की सुविधा भी दी गई है। इससे कागजों में दर्ज जमीन और मौके की स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।

तहसील के चक्कर कम करने की कोशिश

विदित है कि सरकार की इस पूरी पहल का उद्देश्य राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित बनाना है। खासकर EWS प्रमाणपत्र और जमीन से जुड़े मामलों में लोगों को लंबे समय तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नई डिजिटल व्यवस्था के बाद आवेदन से लेकर उसकी निगरानी तक कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन होने से कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है।

हालांकि, नई व्यवस्था का वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि पोर्टल कितनी आसानी से चलता है और ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसका इस्तेमाल कितनी सहजता से कर पाते हैं। फिलहाल सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश की राजस्व सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

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