लखनऊ : उत्तर प्रदेश में आयोजित पुलिस उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा 2026 के पहले ही दिन एक सवाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। हिंदी सेक्शन में पूछे गए एक प्रश्न में विकल्पों में “पंडित” शब्द शामिल होने पर कई नेताओं और सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई। मामला इतना बढ़ गया कि राज्य सरकार को तुरंत जांच के आदेश देने पड़े। यह परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को प्रदेश के 75 जिलों में आयोजित की गई थी। करीब 4,543 पदों पर भर्ती के लिए लगभग 15.75 लाख अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से करीब 10.77 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए।
क्या था वह सवाल, जिससे मचा विवाद
आपको जानकारी के लिए बता दें कि हिंदी प्रश्नपत्र में पूछा गया था:
“अवसर के अनुसार बदल जाने वाले व्यक्ति को क्या कहा जाता है?”
इसके चार विकल्प दिए गए थे:
पंडित
अवसरवादी
निष्कपट
सदाचारी
इसमें “पंडित” शब्द को विकल्प के रूप में शामिल करने पर कुछ नेताओं और लोगों ने इसे ब्राह्मण समाज और विद्वान परंपरा से जोड़कर आपत्तिजनक बताया। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी इस सवाल को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई।
योगी सरकार ने दिए जांच के सख्त निर्देश
गौरतलब है कि मामला बढ़ने के बाद प्रदेश सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि किसी भी जाति या समुदाय का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा और मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सभी भर्ती बोर्डों को निर्देश दिया कि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करते समय जाति, धर्म या समुदाय से जुड़े किसी भी विवादित शब्द से बचा जाए।
आखिर यूपी SI परीक्षा का पेपर कौन बनाता है?
विदित है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती परीक्षाओं का आयोजन उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) करता है। प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया काफी गोपनीय और कई चरणों में होती है।
1. विशेषज्ञों का पैनल
सबसे पहले अलग-अलग विषयों के प्रोफेसर, विषय विशेषज्ञ और अनुभवी अधिकारी मिलकर प्रश्नों का बड़ा बैंक तैयार करते हैं।
2. मॉडरेशन कमेटी द्वारा समीक्षा
इसके बाद एक मॉडरेशन कमेटी इन सवालों की जांच करती है। यह देखा जाता है कि:
प्रश्न सिलेबस के अनुसार हों
भाषा स्पष्ट हो
कठिनाई का स्तर संतुलित हो
कोई सवाल विवादित न हो
3. अंतिम चयन
जब कई सेट तैयार हो जाते हैं, तब बोर्ड की उच्च स्तरीय समिति अंतिम प्रश्नपत्र का चयन करती है और उस पर आधिकारिक मंजूरी दी जाती है।
4. सुरक्षा और प्रिंटिंग
इसके बाद प्रश्नपत्र को अत्यधिक सुरक्षा वाली प्रिंटिंग प्रेस में छापा जाता है। सील बंद बॉक्स में रखकर इसे परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाता है।
5. गोपनीयता की शपथ
परीक्षा से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को गोपनीयता की शपथ दिलाई जाती है। पेपर लीक होने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और जेल का प्रावधान होता है।
कितने अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा
आपको बता दें कि इस भर्ती परीक्षा में कुल 15,75,760 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। चारों पालियों में उपस्थित अभ्यर्थियों की संख्या इस प्रकार रही:
14 मार्च (पहली पाली): 2,63,839
14 मार्च (दूसरी पाली): 2,67,843
15 मार्च (पहली पाली): 2,70,803
15 मार्च (दूसरी पाली): 2,74,918
कुल मिलाकर लगभग 10,77,403 उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए, जबकि करीब 5 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी।
नेताओं और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
गौरतलब है कि इस सवाल को लेकर कई नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। कुछ नेताओं ने इसे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया और जांच की मांग की। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने सवाल उठाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी जाति या पहचान से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि “पंडित” शब्द का अर्थ विद्वान होता है, इसे किसी जाति से जोड़ना जरूरी नहीं है।
अब राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच के बाद यह तय किया जाएगा कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करते समय भाषा और शब्दों के चयन में कितनी सावधानी जरूरी है।