लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में कुल 31 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई, जबकि कुछ प्रस्तावों को फिलहाल रोक दिया गया। इन फैसलों का सीधा असर प्रदेश के लाखों लोगों पर पड़ेगा। कैबिनेट की बैठक में जमीन की फर्जी रजिस्ट्री रोकने, गांवों तक बस सेवा पहुंचाने, सस्ते मकान उपलब्ध कराने और शिक्षकों को कैशलेस इलाज देने जैसे कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए।
जमीन की फर्जी रजिस्ट्री पर लगेगी रोक
आपको बता दें कि कैबिनेट बैठक में सबसे बड़ा फैसला प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने को लेकर लिया गया। अब किसी भी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले विक्रेता का नाम खतौनी में मिलान करना अनिवार्य होगा। यदि दस्तावेजों में दर्ज नाम और खतौनी का नाम अलग पाया जाता है, तो रजिस्ट्रेशन विभाग इसकी जांच करेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी रजिस्ट्री और जमीन घोटालों पर रोक लगाना है। सरकार ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कानून में नई धाराएं जोड़ने का भी फैसला किया है, जिससे अब रजिस्ट्री से पहले संपत्ति के स्वामित्व और दस्तावेजों की पूरी जांच की जाएगी।
12,200 गांवों तक पहली बार पहुंचेगी बस सेवा
गौरतलब है कि कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026 को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत प्रदेश के 12,200 गांवों तक बस सेवा पहुंचाई जाएगी, जहां अब तक बस नहीं पहुंचती थी। सरकार के अनुसार करीब 5000 ऐसे गांव हैं जहां आज तक बस सेवा नहीं पहुंची। अब इन गांवों को भी सड़क परिवहन से जोड़ा जाएगा। इन बसों से ग्रामीणों को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक पहुंचने में आसानी होगी। इससे छात्रों, किसानों और छोटे व्यापारियों को विशेष लाभ मिलेगा।
ओला-उबर जैसी कंपनियों पर सरकार का नियंत्रण
विदित है कि कैबिनेट ने राज्य में ओला, उबर जैसे ऑनलाइन टैक्सी प्लेटफॉर्म को भी नियमन के दायरे में लाने का फैसला किया है। अब इन कंपनियों को राज्य में काम करने के लिए परिवहन विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। नए नियमों के अनुसार ड्राइवर का मेडिकल टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी होगा। वाहन की फिटनेस जांच करानी होगी। आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये होगा। लाइसेंस फीस 5 लाख रुपये तय की गई है। सरकार एक नया परिवहन ऐप भी विकसित करेगी, जिसमें ड्राइवर और वाहनों की पूरी जानकारी दर्ज होगी।
शहरों में सस्ते मकानों की योजना
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत नई नीति को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत अब शहरों में कम कीमत पर मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। ईडब्ल्यूएस वर्ग के मकानों का क्षेत्रफल 30 वर्गमीटर किया गया मकान की कीमत लगभग 9 लाख रुपये तक होगी। केंद्र सरकार 1.5 लाख रुपये और राज्य सरकार 1 लाख रुपये की सहायता देगी। इन मकानों का आवंटन लॉटरी प्रणाली से किया जाएगा।
शिक्षकों को मिलेगा कैशलेस इलाज
गौरतलब है कि कैबिनेट ने शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का फैसला किया है। इस योजना के तहत करीब 1.28 लाख शिक्षकों को लाभ मिलेगा, सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा होगी। प्रति व्यक्ति लगभग 2479 रुपये प्रीमियम खर्च होगा। सरकार पर लगभग 50 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च आएगा। इस योजना के तहत शिक्षकों और उनके परिवार को 5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सख्त नियम
विदित है कि कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों की सेवा नियमावली में भी संशोधन किया है। अब कर्मचारियों को छह महीने के मूल वेतन से अधिक निवेश की जानकारी देनी होगी। हर वर्ष अपनी अचल संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।
अन्य बड़े फैसले
गौरतलब है कि कैबिनेट ने कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी, जिनमें—
•अयोध्या में खेल परिसर निर्माण
•कानपुर ट्रांसगंगा सिटी के लिए पुल निर्माण
•बुंदेलखंड में डेयरी संयंत्र की क्षमता बढ़ाना
•कई शहरों में नई शहरी विकास योजनाएं
•कांशीराम आवास योजना के तहत दलितों को आवास रंगाई पुताई कर फिर से प्रदान किया जायेगा।
जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
सरकार का ग्रामीण और शहरी विकास पर सरकार का फोकस है। कैबिनेट बैठक के फैसलों से साफ है कि राज्य सरकार ग्रामीण परिवहन, शहरी आवास, भूमि रजिस्ट्रेशन और शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से प्रदेश में पारदर्शिता बढ़ेगी, ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सुधरेगी और आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।