नई दिल्ली : भारत में होने वाली अगली जनगणना को इस बार पहले से कहीं ज्यादा सटीक और तेज बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 को आधुनिक तकनीक और डिजिटल सिस्टम के जरिए करने का फैसला किया है, ताकि आंकड़ों की शुद्धता बढ़े और परिणाम जल्दी सामने आ सकें। जानकारी के मुताबिक, अगले महीने से जनगणना का पहला चरण शुरू होने जा रहा है, जिसमें देशभर में मकानों, बस्तियों और क्षेत्रों की सूची तैयार की जाएगी। इसके लिए प्रशासन ने डिजिटल मैपिंग, जियो-टैगिंग और आधुनिक डेटा सिस्टम का सहारा लिया है।
पहले चरण में क्या होगा?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जनगणना के पहले चरण को हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस कहा जाता है। इस चरण में देश के हर शहर और गांव में मौजूद मकानों की पहचान और उनकी सूची तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया के दौरान अधिकारी यह भी दर्ज करेंगे कि किसी इलाके में कितने मकान हैं, उनमें कितने लोग रहते हैं और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति क्या है। इस चरण की मदद से अगले चरण यानी जनसंख्या गणना के लिए पूरी तैयारी की जाएगी।
डिजिटल तकनीक से होगी सटीक गिनती
गौरतलब है कि इस बार जनगणना में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार ने डिजिटल पोर्टल और GIS (Geographic Information System) आधारित मैपिंग सिस्टम तैयार किया है। इसके तहत देशभर के 7 लाख से ज्यादा डिजिटल नक्शे तैयार किए गए हैं और इन्हें सिस्टम में अपलोड कर दिया गया है। एक खास वेब-आधारित मैपिंग एप्लिकेशन के जरिए इन नक्शों की जियो-टैगिंग की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि किसी इलाके की गिनती दो बार न हो और कोई क्षेत्र छूट भी न जाए।
2011 की जनगणना से लिया गया सबक
विदित है कि पिछली बार 2011 की जनगणना के दौरान कई तकनीकी और प्रशासनिक समस्याएं सामने आई थीं। कई जगह मानचित्र समय पर नहीं पहुंचे। प्रगणकों को नक्शों के उपयोग की पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं थी। डेटा को प्रोसेस करने में काफी समय लग गया। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए इस बार सरकार ने बेहतर प्रशिक्षण और डिजिटल व्यवस्था लागू की है।
प्रगणकों को दिया जा रहा खास प्रशिक्षण
गौरतलब है कि इस बार जनगणना को सफल बनाने के लिए मास्टर ट्रेनर, प्रगणक और पर्यवेक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें यह सिखाया जा रहा है कि डिजिटल नक्शों और जियो-टैगिंग सिस्टम का सही तरीके से उपयोग कैसे किया जाए। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी क्षेत्र की जानकारी सही और पूरी तरह दर्ज हो।
जागरूकता अभियान भी होगा शुरू
सरकार का मानना है कि जनगणना की सफलता के लिए जनता की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है। इसी वजह से जनगणना शुरू होने से पहले देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि लोग इस प्रक्रिया को समझें और सही जानकारी देने में सहयोग करें।
जल्दी मिलेंगे नतीजे
आपको बता दें कि सरकार का लक्ष्य है कि इस बार जनगणना के आंकड़े पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से जारी किए जाएं। डिजिटल डेटा कलेक्शन और आधुनिक सिस्टम की वजह से डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
जनगणना देश की योजनाओं के लिए बेहद अहम है। जनगणना सिर्फ जनसंख्या की गिनती नहीं है, बल्कि यह सरकार के लिए विकास योजनाओं की आधारशिला भी होती है। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियां बनाई जाती हैं।