देशभर के वाहन मालिकों के लिए बड़ी खुशखबरी!: दूसरे राज्यों में गाड़ी ट्रांसफर करना अब होगा आसान, NOC का झंझट होगा खत्म, वहीं अब...जानें वाहन मालिकों को होने वाले फायदे और बदलाव_एक नजर
देशभर के वाहन मालिकों के लिए बड़ी खुशखबरी!

नई दिल्ली/ऑटोमोबाइल : देश में वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अगर आप एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट होते समय अपनी कार या बाइक ट्रांसफर कराने के लिए आरटीओ के चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो जाते हैं, तो जल्द ही यह झंझट खत्म हो सकता है। केंद्र सरकार इंटर-स्टेट व्हीकल ट्रांसफर की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है।

खत्म की जा सकती हैं NOC की अनिवार्यता!

आपको बता दें की बताया जा रहा है कि दूसरे राज्य में वाहन ट्रांसफर कराने के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की अनिवार्यता खत्म की जा सकती है। इसके लिए नीति आयोग की एक हाई-लेवल कमेटी ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को प्रस्ताव भेजा है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो वाहन ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो सकती है।

अभी क्या है नियम?

गौरतलब है कि मौजूदा नियमों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपनी गाड़ी को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाता है, तो वह उस राज्य में अधिकतम एक साल तक वाहन चला सकता है। इसके बाद उसे नई जगह के आरटीओ में वाहन का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। लेकिन इस प्रक्रिया से पहले पुराने राज्य के आरटीओ से NOC लेना अनिवार्य होता है। यह सर्टिफिकेट इस बात की पुष्टि करता है कि वाहन पर कोई रोड टैक्स बकाया नहीं है, कोई चालान लंबित नहीं है और गाड़ी से जुड़ा कोई कानूनी मामला नहीं है।

NOC लेने के लिए वाहन मालिक को कई दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं, जैसे—

रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
फिटनेस सर्टिफिकेट
रोड टैक्स की रसीद
अन्य संबंधित दस्तावेज

कई मामलों में यह प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है, जिससे लोगों को आरटीओ के कई चक्कर लगाने पड़ते हैं।

अब आएगा ऑटो-जनरेटेड क्लियरेंस सिस्टम :

विदित है कि नीति आयोग की कमेटी ने सुझाव दिया है कि फिजिकल NOC की जगह “ऑटो-जनरेटेड क्लियरेंस सिस्टम” लागू किया जाए। दरअसल भारत में लगभग सभी वाहनों का डेटा पहले से ही VAHAN (वाहन) डिजिटल डेटाबेस में मौजूद है। इस सिस्टम के जरिए दूसरे राज्य का आरटीओ सीधे वाहन की जानकारी ऑनलाइन देख सकेगा।

यह सिस्टम कैसे काम करेगा?

आपको बता दें कि वाहन का रिकॉर्ड VAHAN डेटाबेस से ऑनलाइन चेक होगा। रोड टैक्स, चालान और अन्य बकाया की जानकारी स्वतः सत्यापित होगी। चोरी या कानूनी मामलों की जांच डिजिटल तरीके से हो सकेगी। वाहन मालिक को पुराने आरटीओ से NOC लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और तेज हो जाएगी।

15 साल पुरानी गाड़ियों को भी मिल सकती है राहत

विदित है कि कमेटी ने एक और बड़ा सुझाव दिया है, जो लाखों वाहन मालिकों के लिए राहत भरा हो सकता है। अभी कई जगहों पर वाहनों की उम्र के आधार पर उन्हें सड़क से हटाने का नियम लागू होता है। लेकिन प्रस्ताव है कि गाड़ियों को उनकी उम्र के बजाय फिटनेस टेस्ट के आधार पर चलने की अनुमति दी जाए। दुनिया के कई देशों में यही व्यवस्था है, जहां वाहन की उम्र से ज्यादा उसकी तकनीकी स्थिति को महत्व दिया जाता है। यदि गाड़ी नियमित फिटनेस टेस्ट पास कर लेती है, तो वह वर्षों तक सड़क पर चल सकती है। इस बदलाव से खासकर कमर्शियल वाहनों और अच्छी स्थिति वाली पुरानी गाड़ियों को फायदा मिल सकता है।

सेकेंड-हैंड कार बाजार को भी मिलेगा फायदा

ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर NOC की अनिवार्यता खत्म हो जाती है, तो सेकेंड-हैंड वाहन बाजार में तेजी आ सकती है। अभी कई लोग दूसरे राज्य में गाड़ी खरीदने या बेचने से बचते हैं क्योंकि ट्रांसफर प्रक्रिया जटिल होती है। लेकिन नया डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद—

•दूसरे राज्य में गाड़ी बेचना आसान होगा
•सेकेंड-हैंड कार बाजार बढ़ेगा
•गाड़ियों की रीसेल वैल्यू बेहतर हो सकती है

वाहन मालिकों को क्या होंगे फायदे?

अगर सरकार यह नया नियम लागू करती है, तो लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।

  1. आरटीओ के चक्कर कम लगेंगे
  2. कागजी प्रक्रिया घटेगी
  3. वाहन ट्रांसफर तेज और आसान होगा
  4. सेकेंड-हैंड कार बाजार को बढ़ावा मिलेगा
  5. डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी

फिलहाल यह प्रस्ताव सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है। यदि इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारत की परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा डिजिटल सुधार साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि VAHAN जैसे केंद्रीकृत डिजिटल सिस्टम की मदद से वाहन ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना संभव है।

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