बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं ये 7 ‘झूठ' बोलना!: अनजान लोगों से बच्चों की सेफ्टी में आयेगा बेहद काम, पुलिस ने बताया कब 'सच' छुपा के भी बच्चे कर सकेंगे अपनी सुरक्षा
बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं ये 7 ‘झूठ' बोलना!

सुरक्षा : बच्चों की सुरक्षा को लेकर छोटी-सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। घर से बाहर निकलते ही बच्चे कई तरह के लोगों और परिस्थितियों का सामना करते हैं। ऐसे में उन्हें डराने के बजाय कुछ आसान लेकिन बेहद जरूरी सुरक्षा नियम सिखाना जरूरी है। हरियाणा पुलिस में कार्यरत और साइबर अपराध जागरूकता से जुड़े साहिल खैरवाल ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर 7 ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें माता-पिता बच्चों को बचपन से ही समझा सकते हैं।

1. अकेले हैं तो किसी को न बताएं

अगर कोई अनजान व्यक्ति दरवाजे पर आकर पूछे कि घर में मम्मी-पापा हैं या नहीं, तो बच्चे को यह नहीं बताना चाहिए कि वह घर में अकेला है। वह कह सकता है कि ‘मम्मी-पापा अभी अंदर हैं।’ मकसद किसी को धोखा देना नहीं, बल्कि बच्चे की सुरक्षा और घर की स्थिति की जानकारी अनजान व्यक्ति को न देना है।

2. अनजान व्यक्ति से लिफ्ट लेने से साफ मना करें

स्कूल या किसी दूसरी जगह से लौटते समय अगर कोई अनजान व्यक्ति कार या बाइक से छोड़ने की पेशकश करे, तो बच्चे को तुरंत मना करना चाहिए। उसे अपने माता-पिता की बताई सुरक्षित व्यवस्था पर ही भरोसा करना चाहिए।

3. चॉकलेट या खिलौने के लालच में न आएं

बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि कोई अनजान व्यक्ति अगर चॉकलेट, खिलौना, पैसे या किसी दूसरी चीज का लालच देकर अपने साथ चलने को कहे तो उसके साथ बिल्कुल न जाएं। बच्चे को तुरंत वहां से हटकर किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति के पास जाना चाहिए।

4. ‘ये बात किसी को मत बताना’ सुनते ही सावधान

अगर कोई व्यक्ति बच्चे से कहे कि ‘मम्मी-पापा को मत बताना’, तो बच्चे को इसे छिपाना नहीं चाहिए। उसे घर पहुंचकर पूरी बात माता-पिता को बतानी चाहिए। बच्चों के साथ ऐसा भरोसे का रिश्ता बनाएं कि वे डर या डांट के कारण कोई बात छिपाएं नहीं।

5. निजी जानकारी किसी अनजान को न दें

बच्चों को अपना घर का पता, स्कूल का नाम, फोन नंबर, माता-पिता की जानकारी या दूसरी निजी बातें अनजान लोगों से साझा नहीं करनी चाहिए। ऑनलाइन दुनिया में भी यही नियम लागू होता है। किसी अनजान व्यक्ति को फोटो, लोकेशन या निजी जानकारी भेजने से भी बचना चाहिए।

6. रास्ता भटक जाएं तो घबराएं नहीं

भीड़ में माता-पिता से अलग हो जाने पर बच्चा इधर-उधर अकेले भटकने के बजाय पुलिसकर्मी, सुरक्षा गार्ड या किसी भरोसेमंद परिवार से मदद मांग सकता है। पहले से बच्चों को यह भी बताएं कि ऐसी स्थिति में उन्हें किससे संपर्क करना है।

7. खतरा लगे तो चुप न रहें

अगर कोई जबरदस्ती पकड़ने, साथ ले जाने या परेशान करने की कोशिश करे तो बच्चे को चुप नहीं रहना चाहिए। वह जोर से मदद के लिए चिल्लाए, लोगों का ध्यान आकर्षित करे और सुरक्षित जगह की ओर जाए।

बच्चों को डर नहीं, समझदारी सिखाएं

गौरतलब है कि बच्चों को सुरक्षा के ये नियम डराकर नहीं बल्कि रोजमर्रा के उदाहरण देकर समझाना ज्यादा प्रभावी है। उन्हें बताएं कि हर अनजान व्यक्ति बुरा नहीं होता, लेकिन अनजान व्यक्ति के साथ अकेले जाना, निजी जानकारी साझा करना या किसी के कहने पर बात छिपाना सुरक्षित नहीं है।

सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे अपने माता-पिता से बिना डरे हर घटना साझा कर सकें। सुरक्षा की पहली सीढ़ी सिर्फ सावधानी नहीं, बल्कि बच्चे और माता-पिता के बीच भरोसा है।

अन्य खबरे