यूपी में आवास योजना का विस्तार!: अब पत्रकार, वकील, शिक्षक और डॉक्टर को भी मिलेंगे आवास, वहीं 900 करोड़ की पहली किश्त...माफियाओं की जमीन पर...पूरा मामला_एक नज़र
यूपी में आवास योजना का विस्तार!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति और विकास एजेंडा के बीच एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसने लाखों लोगों की उम्मीदें जगा दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ गरीब ही नहीं, बल्कि वकील, डॉक्टर, शिक्षक और पत्रकार भी सरकारी आवास योजनाओं के दायरे में आएंगे।

क्या है पूरा मामला?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत बड़ा कदम उठाते हुए 92,098 लाभार्थियों के खातों में 900 करोड़ रुपये की पहली किस्त ट्रांसफर की। यह पैसा सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए लोगों के बैंक खातों में भेजा गया, यानी न बिचौलिया, न भ्रष्टाचार।

अब सिर्फ गरीब नहीं, इन वर्गों को भी मिलेगा घर!

गौरतलब है कि सीएम योगी ने अपने संबोधन में बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब पत्रकार, वकील, डॉक्टर और शिक्षक भी आवास योजना के दायरे में शामिल होंगे। उन्होंने खास तौर पर पत्रकारों का जिक्र करते हुए कहा कि “ये लोग दिनभर मैदान में रहते हैं, अगर हर जिले में इन्हें सस्ता आवास मिले तो इनके जीवन में स्थिरता आएगी।”

माफिया की जमीन पर बनेंगे फ्लैट!

आपको बता दें कि इस फैसले का सबसे बड़ा पहलू यहीं है कि जिन जमीनों पर पहले माफियाओं का कब्जा था, उन्हें खाली कराया गया। अब उन्हीं जमीनों पर हाईराइज बिल्डिंग्स बनाई जाएंगी। जरूरत पड़ी तो माफिया की अपनी जमीन भी जब्त की जा सकती है। मतलब साफ है कि “जो जमीन कब्जाई गई थी, अब उसी पर गरीब और प्रोफेशनल्स का घर बनेगा!”

सरकार का बड़ा दावा

विदित है कि मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 62 लाख से ज्यादा परिवारों को घर मिल चुका है। यूपी अब “बीमारू राज्य” नहीं, बल्कि देश का ग्रोथ इंजन बन रहा है। योजनाओं का फायदा हर वर्ग तक बिना भेदभाव पहुंचाया जा रहा है।

नई योजना से क्या होगा फायदा?

आपको बता दें कि इस फैसले के कई बड़े असर हो सकते हैं:

•मध्यम वर्ग के प्रोफेशनल्स को राहत

•पत्रकारों और शिक्षकों को स्थिर जीवन

•शहरों में व्यवस्थित हाउसिंग

•माफिया राज पर और कड़ा प्रहार

अधिकारियों को सख्त निर्देश

गौरतलब है कि सीएम योगी ने अधिकारियों को साफ कहा कि हर जिले में इस योजना को लागू करें। सस्ती और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सामग्री उपलब्ध कराएं। साथ ही 75% काम पूरा होते ही दूसरी किस्त तुरंत दें।

यह फैसला सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि एक पॉलिटिकल और सोशल मैसेज भी है कि अब हर वर्ग को सम्मानजनक घर मिलेगा, चाहे वह गरीब होगा या समाज का प्रोफेशनल चेहरा।

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