हरियाणा : हरियाणा में निजी बस संचालकों की मनमानी और रियायती पास धारकों को बस में न चढ़ाने की शिकायतों पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। Transport Department Haryana ने निर्देश जारी किए हैं कि प्रदेश के सभी निजी स्टेज कैरिज संचालकों को Haryana Roadways की तरह ही सभी श्रेणियों के 'फ्री' और 'कन्सेशनल' पास धारकों को यात्रा करवानी होगी।
यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है, जिसके दायरे में प्रदेश में संचालित हो रही करीब 1750 निजी बसें आएंगी।
क्या है नया आदेश?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परिवहन विभाग की ओर से सभी डीटीओ-सह-सचिवों को लेटर जारी किया गया है। इस लेटर में साफ कहा गया है:
सबसे अहम बात यह है कि सरकार ने साफ किया है कि इस सेवा के बदले निजी बस संचालकों को किसी भी प्रकार की सरकारी सब्सिडी देय नहीं होगी। यह उनके परमिट की अनिवार्य शर्तों का हिस्सा है।
हाईकोर्ट का भी आदेश
गौरतलब है कि करीब सात माह पहले Hisar Court ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा था कि जब तक हाईकोर्ट से कोई स्थगन आदेश (स्टे) नहीं आता, तब तक प्राइवेट बसों में भी सरकारी रियायती पास मान्य रहेंगे। यह आदेश लॉ स्टूडेंट Pooja Bishnoi की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया था। इसी मामले को लेकर प्राइवेट बस संचालकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की हुई है, लेकिन अभी तक कोई स्टे ऑर्डर नहीं मिला है।
ऑपरेटर्स ने कहा; नहीं मानेंगे आदेश
विदित है कि विभाग के इस आदेश पर निजी बस ऑपरेटरों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। State Garage Transport Society and Private Bus Operator Welfare Association के राज्य प्रधान Dr. Dhan Singh ने कहा:
एसोसिएशन ने साफ कहा कि जब तक सरकार payment और प्रतिपूर्ति की लिखित नीति स्पष्ट नहीं करती, तब तक रोडवेज के पास उनकी बसों में मान्य नहीं होंगे।
विभाग ने कहा- लापरवाही नहीं चलेगी
परिवहन विभाग के सुपरिंटेंडेंट Baljinder Singh ने बताया कि विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि निजी बस ड्राइवर छात्रों और बुजुर्गों को पास होने के बावजूद बस में नहीं बैठाते या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। उन्होंने साफ किया कि जनहित में नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी और बस संचालक के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की जाएगी।
अब आगे क्या?
फिलहाल, परिवहन विभाग का आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। प्राइवेट बस ऑपरेटरों ने इसका विरोध किया है और हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद है। लेकिन जब तक कोर्ट से कोई स्टे ऑर्डर नहीं आता, तब तक सभी निजी बसों में फ्री और कन्सेशनल पास मान्य होंगे।
छात्रों, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए यह एक बड़ी राहत है, जबकि निजी बस ऑपरेटरों के लिए यह आर्थिक संकट खड़ा कर सकता है। अब देखना यह है कि हाईकोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाता है।