नई दिल्ली: क्या इस सदी के अंत तक इंसानों के अस्तित्व पर ऐसा संकट आ सकता है, जो पूरी मानव सभ्यता को मिटाने की क्षमता रखता हो? चिकित्सा जगत की प्रतिष्ठित पत्रिका द लैंसेट से जुड़ी नई रिपोर्ट ने इसी सवाल पर दुनिया का ध्यान खींचा है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दुरुपयोग और परमाणु संघर्ष को ऐसे गंभीर जोखिमों में शामिल किया गया है, जिनके सबसे विनाशकारी परिणाम मानवता के अस्तित्व तक को खतरे में डाल सकते हैं। हालांकि, रिपोर्ट यह नहीं कहती कि 2100 तक इंसान निश्चित रूप से विलुप्त हो जाएंगे। इसका मकसद संभावित खतरों को पहचानकर समय रहते उनसे बचाव करना है।
35 विशेषज्ञों ने किन खतरों पर किया अध्ययन?
आपको बता दें कि ‘द लैंसेट कमीशन ऑन 21वीं सदी के वैश्विक स्वास्थ्य खतरे’ की रिपोर्ट तैयार करने में स्वास्थ्य, विज्ञान और वैश्विक नीतियों से जुड़े 35 विशेषज्ञ शामिल रहे। इसमें 204 देशों और क्षेत्रों से संबंधित आंकड़ों तथा भविष्य के जोखिमों का विश्लेषण किया गया। विशेषज्ञों ने वर्ष 2100 तक मानव स्वास्थ्य और जीवन पर असर डाल सकने वाले 17 प्रमुख खतरों की पहचान की है। इनमें दो जोखिमों को मानव अस्तित्व के लिए विशेष रूप से गंभीर माना गया है।
पहला बड़ा खतरा: AI का गलत इस्तेमाल
गौरतलब है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से दुनिया बदल रहा है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल गंभीर संकट भी पैदा कर सकता है। रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि उन्नत AI का दुरुपयोग जैविक हथियार विकसित करने या खतरनाक जैविक तकनीकों को गलत हाथों तक पहुंचाने में हो सकता है। यदि ऐसी तकनीक से तैयार कोई खतरनाक जैविक एजेंट नियंत्रण से बाहर फैल जाए, तो उसका प्रभाव कई देशों तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ AI के विकास और इस्तेमाल पर प्रभावी सुरक्षा नियम बनाने की जरूरत बता रहें हैं।
दूसरा खतरा: परमाणु युद्ध और दुनिया में अकाल
परमाणु संघर्ष का खतरा भी रिपोर्ट में प्रमुखता से सामने आया है। बड़े पैमाने पर परमाणु युद्ध होने की स्थिति में विस्फोटों से उठने वाला धुआं और राख वातावरण में पहुंचकर सूर्य की रोशनी को प्रभावित कर सकते हैं। इससे तापमान गिरने, फसलों के उत्पादन में कमी और खाद्य आपूर्ति बाधित होने जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में दुनिया के कई हिस्सों में भोजन की भारी कमी हो सकती है। इसे संभावित ‘परमाणु अकाल’ के खतरे के रूप में देखा जाता है। हालांकि, यह सबसे विनाशकारी परिस्थितियों में से एक है, न कि कोई निश्चित भविष्यवाणी।
AI और परमाणु युद्ध के अलावा 15 खतरे कौन-से हैं?
विदित है कि रिपोर्ट में मानव स्वास्थ्य और जीवन को नुकसान पहुंचाने वाले 15 अन्य बड़े जोखिम भी शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं:
जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण
प्राकृतिक महामारियां और रोगाणुरोधी प्रतिरोध
बच्चों में कुपोषण और मोटापा
पारंपरिक सशस्त्र संघर्ष
स्वास्थ्य के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और उच्च रक्तचाप
धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन
आय में असमानता और शिक्षा का निम्न स्तर
अस्वस्थ वृद्धावस्था
इनमें से कई समस्याएं पहले से लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। रिपोर्ट का जोर इस बात पर है कि इनके प्रभाव एक-दूसरे को बढ़ा सकते हैं और लंबे समय में भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह चेतावनी?
विदित है कि भारत के लिए वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, गर्मी, खाद्य सुरक्षा और महामारियों से जुड़े जोखिम खास महत्व रखते हैं। प्रदूषण का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है, जबकि अत्यधिक गर्मी, अनियमित बारिश और सूखे जैसी घटनाएं खेती तथा आजीविका को प्रभावित कर सकती हैं। यदि फसल उत्पादन घटता है और खाद्य पदार्थ महंगे होते हैं, तो कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों पर अधिक दबाव पड़ सकता है। वहीं, AI का दुरुपयोग और परमाणु संघर्ष जैसे अंतरराष्ट्रीय खतरे किसी एक देश तक सीमित नहीं रहते।
मानवता को बचाने के लिए क्या उपाय सुझाए गए?
रिपोर्ट में सरकारों और संस्थानों को तीन प्रमुख दिशाओं में काम करने की सलाह दी गई है। पहली, स्वास्थ्य प्रणालियों को इस तरह तैयार किया जाए कि महामारी या अन्य बड़े संकट आने से पहले उनकी पहचान और रोकथाम की जा सके। दूसरी, टीकों, नई दवाओं और जलवायु संबंधी तकनीकों के विकास में निवेश बढ़ाया जाए। तीसरी, उभरते खतरों की लगातार निगरानी की व्यवस्था मजबूत की जाए। इसके साथ ही AI के सुरक्षित इस्तेमाल, परमाणु संघर्ष को रोकने, देशों के बीच सहयोग बढ़ाने और कमजोर समुदायों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
क्या सच में 2100 तक खत्म हो सकती है इंसानी सभ्यता?
गौरतलब है कि रिपोर्ट की सबसे अहम बात यह है कि गंभीर जोखिमों की पहचान का अर्थ उनका निश्चित रूप से घटित होना नहीं है। AI का दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल और परमाणु युद्ध होने की आशंका को विशेषज्ञ कम संभावना वाला, लेकिन बेहद गंभीर परिणामों वाला खतरा मानते हैं।
इंसानियत का भविष्य किसी एक खतरे से नहीं, बल्कि तकनीक, युद्ध, पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े कई संकटों से प्रभावित हो सकता है। रिपोर्ट का संदेश डर फैलाना नहीं, बल्कि चेतावनी देना है; ताकि आज लिए गए सही फैसले आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य का रास्ता बना सकें।