बच्चों की फोटो सोशल मीडिया पर डालना पड़ सकता है भारी!: AI-डीपफेक से लेकर लोकेशन ट्रैकिंग तक का मंडरा रहा खतरा, चाइल्ड सेफ्टी के लिए पेरेंट्स इन 10 बातों का रखें जरूर ध्यान?
बच्चों की फोटो सोशल मीडिया पर डालना पड़ सकता है भारी!

सुरक्षा : सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीरें और वीडियो शेयर करना आज आम बात हो गई है। जन्मदिन, स्कूल फंक्शन, छुट्टियां, पुरस्कार या रोजमर्रा के प्यारे पलों को माता-पिता फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे प्लेटफॉर्म पर साझा करते हैं। लेकिन यही तस्वीरें कभी-कभी बच्चे की सुरक्षा और डिजिटल प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। खासकर AI और डीपफेक के दौर में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।

एक फोटो से सामने आ सकती है बच्चे की पूरी जानकारी

आपको बता दें कि बच्चे की तस्वीर देखकर केवल चेहरा ही सामने नहीं आता। कई बार फोटो के पीछे स्कूल का नाम, यूनिफॉर्म, घर का पता, वाहन नंबर, दुकान, पार्क या दूसरी पहचान योग्य जगह दिखाई दे जाती है। पोस्ट के साथ लोकेशन टैग होने पर अनजान व्यक्ति को यह भी पता चल सकता है कि बच्चा किस जगह जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक फोटो को सार्वजनिक करने के बाद उसके इस्तेमाल पर पूरा नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल होता है। कोई व्यक्ति तस्वीर डाउनलोड करके उसे दूसरी जगह इस्तेमाल कर सकता है या उसमें बदलाव कर सकता है।

AI ने बढ़ाया खतरा, साधारण फोटो भी बन सकती है डीपफेक

गौरतलब है कि AI तकनीक ने तस्वीरों के गलत इस्तेमाल का खतरा और बढ़ा दिया है। किसी सामान्य फोटो में डिजिटल बदलाव करके उसे भ्रामक या आपत्तिजनक रूप दिया जा सकता है। इसके अलावा फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाना, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग और ब्लैकमेलिंग जैसे खतरे भी सामने आ सकते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ माता-पिता को बच्चों की तस्वीरें पोस्ट करने से पहले दो बार सोचने की सलाह देते हैं।

बच्चों की ये जानकारी बिल्कुल सार्वजनिक न करें

माता-पिता को बच्चे का पूरा नाम, जन्मतिथि, स्कूल, क्लास-सेक्शन, घर का पता, मोबाइल नंबर, आधार या अन्य पहचान पत्र, लाइव लोकेशन और रोजाना की दिनचर्या सोशल मीडिया पर साझा करने से बचना चाहिए। खास तौर पर रिपोर्ट कार्ड, एडमिट कार्ड, सर्टिफिकेट, पासपोर्ट या मेडिकल दस्तावेजों की तस्वीरें पोस्ट करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इनमें कई संवेदनशील जानकारियां होती हैं।

स्कूल की पोस्ट से भी हो सकता है जोखिम

विदित है कि स्कूलों के सोशल मीडिया अकाउंट अक्सर सार्वजनिक होते हैं। किसी बच्चे की फोटो के साथ उसका नाम, क्लास, स्कूल टाइमिंग या लोकेशन साझा होने पर अनजान लोग उसकी दिनचर्या के बारे में जानकारी जुटा सकते हैं। इसलिए स्कूलों को भी फोटो पोस्ट करने से पहले अभिभावकों की सहमति और बच्चों की पहचान की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।

पेरेंट्स के लिए 10 जरूरी सेफ्टी टिप्स

  1. सोशल मीडिया अकाउंट को प्राइवेट रखें।

  2. बच्चों की फोटो में लोकेशन टैग बंद रखें।

  3. पोस्ट को पब्लिक करने से बचें।

  4. समय-समय पर अपनी फ्रेंड लिस्ट की समीक्षा करें।

  5. फोटो डालने से पहले सोचें कि इसकी जरूरत वास्तव में है या नहीं।

  6. बच्चे की निजी जानकारी सार्वजनिक न करें।

  7. Two-Factor Authentication चालू रखें।

  8. सोशल मीडिया की प्राइवेसी सेटिंग नियमित रूप से जांचें।

  9. संदिग्ध अकाउंट को तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करें।

  10. बच्चों को भी सुरक्षित और असुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार के बारे में समझाएं।

गलती हो जाए तो तुरंत उठाएं ये कदम

अगर बच्चे की तस्वीर का गलत इस्तेमाल दिखाई दे तो उसका स्क्रीनशॉट लेकर सबूत सुरक्षित रखें। संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें और जरूरत पड़ने पर साइबर सेल में शिकायत करें। साइबर अपराध की शिकायत 1930 हेल्पलाइन या सरकारी साइबर क्राइम पोर्टल के माध्यम से की जा सकती है।

सबसे जरूरी बात यही है है कि सोशल मीडिया के कुछ लाइक्स और कमेंट्स के लिए बच्चे की डिजिटल सुरक्षा को जोखिम में न डालें। पोस्ट करने से पहले हमेशा सोचें कि क्या यह तस्वीर भविष्य में भी बच्चे के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक रहेगी।

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