ज़मीन खरीदने से पहले अच्छे से जाँच ले ये 7 दस्तावेज, नहीं तो हो सकता आपके साथ बड़ा फ्रॉड!: एक गलती और डूब सकती हैं जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई, रजिस्ट्री समेत...
ज़मीन खरीदने से पहले अच्छे से जाँच ले ये 7 दस्तावेज, नहीं तो हो सकता आपके साथ बड़ा फ्रॉड!

नई दिल्ली: जमीन खरीदना जिंदगी के सबसे बड़े आर्थिक फैसलों में से एक होता है। लोग सालों की बचत लगाकर प्लॉट, खेत या मकान के लिए जमीन खरीदते हैं, लेकिन यही सौदा अगर बिना जांच-पड़ताल के किया जाए तो भारी नुकसान भी करा सकता है। जमीन दिखाने वाला व्यक्ति खुद को मालिक बताए, रजिस्ट्री भी दिखा दे, फिर भी मामला पूरी तरह सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं। कहीं जमीन किसी और के नाम दर्ज हो सकती है, कहीं बैंक का कर्ज या मॉर्गेज हो सकता है तो कहीं परिवार के बीच मालिकाना हक का विवाद चल रहा हो। ऐसे में जमीन खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच करना बेहद जरूरी है।

1. सबसे पहले देखें Sale Deed यानी रजिस्ट्री

आपको बता दें कि रजिस्टर्ड Sale Deed में जमीन के मालिक, क्षेत्रफल, खसरा नंबर और बिक्री से जुड़ी अहम जानकारी होती है। लेकिन सिर्फ रजिस्ट्री देखकर संतुष्ट न हों। इसमें दर्ज नाम, खसरा नंबर और जमीन का क्षेत्रफल सरकारी रिकॉर्ड से मिलाएं। सबसे जरूरी सवाल यह है कि जमीन बेचने वाला व्यक्ति वास्तव में उसे बेचने का अधिकार रखता भी है या नहीं।

2. Mother Deed खोलेगी जमीन के पुराने मालिकों का राज

गौरतलब है कि आज जमीन किसके नाम है, यह जानना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि जमीन वर्तमान मालिक तक पहुंची कैसे। Mother Deed या पुराने स्वामित्व दस्तावेजों से जमीन की Ownership History समझने में मदद मिलती है। पुराने मालिकों और वर्तमान मालिक के बीच स्वामित्व की कड़ी में कोई गड़बड़ी या अस्पष्टता हो तो सौदा आगे बढ़ाने से पहले विशेषज्ञ से जांच कराएं।

3. Encumbrance Certificate बताएगा कर्ज तो नहीं

जमीन पर बैंक का लोन, मॉर्गेज या कोई अन्य पंजीकृत लेन-देन है या नहीं, इसकी जांच के लिए Encumbrance Certificate यानी EC महत्वपूर्ण दस्तावेज है। अगर जमीन पहले से गिरवी है और खरीदार ने बिना जांच पैसा दे दिया, तो आगे गंभीर कानूनी और आर्थिक परेशानी हो सकती है।

4. खसरा-खतौनी और जमाबंदी जरूर मिलाएं

विदित है कि सरकारी भूमि रिकॉर्ड में जमीन का खसरा नंबर, क्षेत्रफल और मालिकाना जानकारी दर्ज हो सकती है। विक्रेता जो जमीन दिखा रहा है, उसका विवरण सरकारी रिकॉर्ड से बिल्कुल मेल खाना चाहिए। क्षेत्रफल या मालिक के नाम में अंतर दिखाई दे तो तुरंत सवाल उठना चाहिए।

5. Mutation यानी दाखिल-खारिज भी जांचें

जमीन के मालिकाना हक में बदलाव होने पर सरकारी रिकॉर्ड में Mutation यानी दाखिल-खारिज की एंट्री होती है। जमीन खरीदने, विरासत में मिलने या किसी अन्य वैध हस्तांतरण के बाद रिकॉर्ड में किसका नाम दर्ज है, यह जरूर देखें।

6. नक्शा देखकर जमीन की सीमा पहचानें

कागज पर जमीन कुछ और और मौके पर कुछ और निकल जाए, ऐसा विवाद भी सामने आ सकता है। इसलिए Land Map में दर्ज खसरा नंबर, क्षेत्रफल और चारों सीमाओं को मौके की स्थिति से मिलाएं। जमीन तक पहुंचने वाला रास्ता भी पहले स्पष्ट कर लें।

7. कोर्ट केस और पारिवारिक विवाद की जांच

आपको बता दें कि जमीन किसी मुकदमे, पारिवारिक विवाद, अधिग्रहण या दूसरे कानूनी विवाद में फंसी है या नहीं, इसकी जानकारी लेना बेहद जरूरी है। खासकर पैतृक या विरासत वाली संपत्ति में सावधानी बढ़ा दें। कई बार जमीन पर कई लोगों का अधिकार होता है, लेकिन बिक्री केवल एक व्यक्ति करने की कोशिश करता है।

सिर्फ कागज देखना नहीं, आपस में मिलान करना जरूरी

जमीन खरीदते समय सबसे बड़ी गलती सिर्फ विक्रेता के दिखाए दस्तावेजों पर भरोसा करना है। नाम, खसरा नंबर, क्षेत्रफल, सीमाएं और मालिकाना हक; हर जानकारी को दूसरे रिकॉर्ड से मिलाएं। जरूरत पड़ने पर स्थानीय राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और कानूनी स्थिति की स्वतंत्र जांच कराएं। बड़े भुगतान या विवादित संपत्ति के मामले में योग्य प्रॉपर्टी वकील से दस्तावेजों की जांच कराना समझदारी है।

याद रखें कि जमीन देखने से पहले नहीं, जमीन के कागज समझने के बाद फैसला करें। क्योंकि कुछ घंटों की जांच आपको भविष्य के वर्षों के मुकदमे और आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।

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