नई दिल्ली/जम्मू-कश्मीर : Indus Waters Treaty को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अब नए चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। Pahalgam आतंकी हमले के बाद भारत अब सिर्फ सीमा सुरक्षा ही नहीं, बल्कि जल संसाधनों और हाइड्रोपावर रणनीति पर भी तेजी से काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, भारत जम्मू-कश्मीर में अपनी परियोजनाओं को तेज कर पश्चिमी नदियों के पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सलाल डैम में शुरू हुआ बड़ा डी-सिल्टिंग अभियान
आपको बता दें कि Salal Dam में वर्षों से जमा गाद हटाने का बड़ा अभियान शुरू हो चुका है। NHPC द्वारा ड्रेजिंग और सिल्ट फ्लशिंग का काम तेजी से किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि अगले 3 से 4 वर्षों तक लगातार यह प्रक्रिया चलेगी और हर साल 40 से 50 मिलियन क्यूबिक मीटर गाद हटाने का लक्ष्य रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे:
कश्मीर में दो नई सुरंग परियोजनाओं पर तेजी
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में दो नई रणनीतिक सुरंग परियोजनाओं का सर्वे पूरा हो चुका है। फिलहाल उनकी व्यवहार्यता रिपोर्ट पर अध्ययन चल रहा है। हालांकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य जल प्रबंधन और भंडारण प्रणाली को और मजबूत करना है।
सिंधु की सहायक नदियों पर बढ़ेगा फोकस
विदित है कि भारत अब अपने हिस्से के पानी का “मैक्सिमम यूटिलाइजेशन” सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर बड़े स्तर पर जल भंडारण और हाइड्रोपावर नेटवर्क तैयार हो जाता है, तो इसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ सकता है क्योंकि वहां की खेती और सिंचाई का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है।
हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अपने अधिकारों का उपयोग कर रहा है।
तेजी से बढ़ रही हाइड्रोपावर क्षमता
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
इन परियोजनाओं से जम्मू-कश्मीर में:
बताया जा रहा है कि हर बड़ी परियोजना से लगभग 5 से 6 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
भारत ने हेग कोर्ट के फैसले को भी ठुकराया
गौरतलब है कि भारत ने Court of Arbitration के हालिया फैसले को भी मानने से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि यह अदालत “अवैध तरीके से गठित” की गई है और भारत इसके फैसलों को मान्यता नहीं देता।
भारत का कहना है कि:
पहलगाम हमले के बाद बदली रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि पहलगाम हमले के बाद भारत की रणनीति अब बहुस्तरीय हो चुकी है। एक तरफ कूटनीतिक और सुरक्षा मोर्चे पर दबाव बढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जल, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर को भी रणनीतिक ताकत के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में सिंधु नदी प्रणाली सिर्फ जल संसाधन का मुद्दा नहीं रहेगी, बल्कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कारक बन सकती है।