नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी मैसेजिंग ऐप और उसकी पैरेंट कंपनी को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के सामने झुकना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद WhatsApp और उसकी पैरेंट कंपनी Meta ने बड़ा एलान किया है कि अब यूजर्स की स्पष्ट सहमति के बिना उनका डेटा विज्ञापन या अन्य उद्देश्यों के लिए साझा नहीं किया जाएगा।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कंपनियों की यू-टर्न :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि डिजिटल रूप से निर्भर “साइलेंट कस्टमर्स” की सुरक्षा जरूरी है। अदालत ने साफ किया कि “प्राइवेसी अधिकार के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।” कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि बड़ी टेक कंपनियां अपने दबदबे का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।
क्या है पूरा विवाद?
मामला 2021 की व्हाट्सएप प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा है। उस समय कंपनी ने नई नीति लागू करते हुए यूजर्स को “माने या छोड़ दें” (Take it or Leave it) का विकल्प दिया था। 2016 की पॉलिसी में डेटा शेयरिंग से बाहर रहने का विकल्प था, लेकिन 2021 की नीति में यह हट गया। इससे यूजर्स का डेटा मेटा की अन्य सेवाओं के साथ साझा किया जा सकता था।
213 करोड़ का जुर्माना :
गौरतलब है कि Competition Commission of India (CCI) ने नवंबर 2024 में व्हाट्सएप पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। आयोग ने कहा कि कंपनी ने अपनी बाजार में मजबूत स्थिति का दुरुपयोग किया और प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन किया। हालांकि National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने बाद में कुछ हिस्सों में राहत दी, लेकिन जुर्माना बरकरार रखा।
16 मार्च तक लागू होगा नया सिस्टम :
विदित है कि सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कंपनी 16 मार्च तक नया “यूजर-चॉइस” सिस्टम लागू कर देगी। कोर्ट ने कंपनियों की अंतरिम राहत याचिका खारिज करते हुए पालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
डिजिटल विज्ञापन पर क्या असर?
आपको बता दें कि यह मामला सिर्फ प्राइवेसी तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि क्या बड़ी डिजिटल कंपनियां अलग-अलग प्लेटफॉर्म का डेटा जोड़कर अपने विज्ञापन कारोबार को मजबूत कर सकती हैं? भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में यह फैसला भविष्य की डेटा नीतियों और ऑनलाइन विज्ञापन के मॉडल को प्रभावित कर सकता है।
अब आगे क्या?
गौरतलब है कि 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी की वैधता पर मुख्य अपील अभी लंबित है। विज्ञापन के लिए डेटा शेयरिंग पर पांच साल की रोक को लेकर CCI की अपील बाकी है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला बड़ी टेक कंपनियों के लिए मिसाल बन सकता है
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद व्हाट्सएप और मेटा को यूजर्स की सहमति को प्राथमिकता देनी पड़ी है। अब बिना अनुमति डेटा शेयरिंग नहीं होगी; कम से कम कंपनियों ने यही भरोसा दिया है। डिजिटल भारत में यह मामला प्राइवेसी बनाम बिजनेस मॉडल की बड़ी लड़ाई बन चुका है।