नई दिल्ली : भारत-पाकिस्तान जल विवाद को लेकर एक बड़ा और निर्णायक संकेत सामने आया है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि अब सिंधु नदी का वह पानी, जो वर्षों से पाकिस्तान की ओर बहता रहा, उसे भारत अपने उपयोग में लाने की तैयारी कर चुका है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है और जल्द ही जमीन पर काम शुरू होने की उम्मीद है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भारत अपने जल संसाधनों का पूरा उपयोग करेगा और अब पानी को “बिना इस्तेमाल सीमा पार जाने” नहीं दिया जाएगा।
पाकिस्तान की पानी रोकने की तैयारी :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार की योजना के अनुसार भारत उन नदियों के पानी को रोककर या डायवर्ट करके देश के अंदर इस्तेमाल करेगा जो अब तक पाकिस्तान की ओर बह जाता था।
इससे किन राज्यों को लाभ?
गौरतलब है कि इस योजना से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान औऱ दिल्ली को फायदा होगा। यानी उत्तर भारत के सूखा-प्रभावित और जल संकट झेल रहे इलाकों को सबसे बड़ा फायदा मिल सकता है। सरकार का तर्क है कि पानी देश की संपत्ति है, और पहले उसका उपयोग देशवासियों के लिए होना चाहिए।
यमुना परियोजना पर भी तेज होगा काम :
विदित है कि सरकार सिर्फ सिंधु जल पर ही नहीं, बल्कि यमुना जल वितरण पर भी बड़ा कदम उठाने जा रही है। हरियाणा-राजस्थान के बीच सहमति बन चुकी है। पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की योजना है। इसका अनुमानित लागत ₹77 हजार करोड़ से ₹1 लाख करोड़ है। सरकार का दावा है कि भविष्य में राजस्थान जैसे सूखे प्रदेश को सबसे ज्यादा पानी मिलने की स्थिति बन सकती है।
शेखावाटी क्षेत्र को मिलेगा पानी :
गौरतलब है कि राजस्थान के शेखावाटी इलाके के तीन जिलों को यमुना का पानी देने की दिशा में भी काम आगे बढ़ चुका है। तकनीकी सर्वे और DPR परीक्षण जारी है।
योजना पूरी होने पर लंबे समय से जल संकट झेल रहे इलाके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
जल जीवन मिशन और जल प्रबंधन :
केंद्र का कहना है कि घर-घर पानी पहुंचाने के लिए राज्यों को 50% तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। हजारों शिकायतों की जांच के लिए टीमें बनाई गईं और कार्रवाई भी हुई। सरकार का लक्ष्य साफ है खेती व पेयजल के साथ पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है।
संसाधनों का राष्ट्रीय उपयोग का सन्देश :
इस पूरे फैसले को सिर्फ एक परियोजना नहीं बल्कि रणनीतिक कदम माना जा रहा है। संदेश साफ है कि भारत अब अपने प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर अधिक आक्रामक और आत्मनिर्भर नीति की ओर बढ़ रहा है।
क्या बदल सकता है आगे, व इसके फायदे?
आपको बता दें कि इस योजना के निम्नलिखित फायदे होंगे।
●उत्तर भारत के जल संकट में राहत
●सिंचाई क्षेत्र बढ़ सकता है
●भूजल पर निर्भरता कम होगी
●भारत-पाक जल संबंधों पर असर संभव
फिलहाल सरकार तकनीकी और कानूनी पहलुओं को अंतिम रूप दे रही है। आने वाले समय में यह परियोजना दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी जल प्रबंधन योजनाओं में से एक साबित हो सकती है।