विश्व : ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 की ताजा रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर एक बड़ा संकेत दिया है। भारत में जहां आतंकी घटनाओं में तेज गिरावट दर्ज की गई है, वहीं पाकिस्तान पहली बार दुनिया का सबसे ज्यादा आतंकवाद प्रभावित देश बनकर सामने आया है।
भारत में आतंक पर लगाम, आंकड़े दे रहे राहत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पिछले एक साल में आतंकी घटनाओं में 43% की कमी आई। आतंकी हमलों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई। भारत की रैंकिंग 11वें से सुधरकर 13वें स्थान पर पहुंची। यह संकेत देता है कि सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति और कार्रवाई का असर जमीन पर दिख रहा है।
पाकिस्तान बना आतंकवाद का ‘एपिसेंटर’
रिपोर्ट का सबसे बड़ा खुलासा यह है कि पाकिस्तान अब दुनिया का सबसे अधिक आतंक प्रभावित देश बन गया है। पिछले वर्षों की तुलना में वहां हमलों और मौतों में तेज बढ़ोतरी हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, अफगानिस्तान में बदले हालात और आतंकी संगठनों की सक्रियता इसका बड़ा कारण है।
दक्षिण एशिया अब भी सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र
गौरतलब है कि लगातार 10वें साल दक्षिण एशिया आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र बना रहा यानी भारत में सुधार के बावजूद क्षेत्रीय खतरा अभी भी कायम है
दुनियाभर में क्या बदला?
विदित है कि रिपोर्ट कुछ राहत भरी तस्वीर भी दिखाती है:
•आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28% कमी
•आतंकी हमलों की संख्या में 22% गिरावट (करीब 2,944 हमले)
•81 देशों में स्थिति बेहतर, जबकि 19 देशों में खराब
पश्चिमी देशों में नया खतरा
आपको बता दें कि जहां एशिया में कुछ सुधार दिखा, वहीं पश्चिमी देशों में खतरा बढ़ा:
•मौतों में 280% तक बढ़ोतरी
•यूरोप के 14 देशों में 58 हमले
•ब्रिटेन में 3000+ गिरफ्तारियां
यह दिखाता है कि आतंकवाद अब नए क्षेत्रों में फैल रहा है।
युवाओं को ऐसे बना रहे कट्टरपंथी
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आतंकवाद का नया चेहरा डिजिटल हो चुका है:
•सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क
•मीम्स और कंटेंट से हिंसा को “नॉर्मल” बनाना
•एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर ब्रेनवॉश
•बिना किसी बड़े नेटवर्क के भी युवाओं की भर्ती
यानी अब आतंकवाद का खतरा सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं, बल्कि ऑनलाइन भी तेजी से फैल रहा है।
भारत के लिए यह रिपोर्ट राहत और चेतावनी; दोनों लेकर आई है। एक तरफ आतंकी घटनाओं में कमी सकारात्मक संकेत है दूसरी तरफ पड़ोसी देशों की स्थिति और डिजिटल कट्टरपंथ नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं। आने वाले समय में सुरक्षा रणनीति को सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी उतनी ही मजबूत करना होगा।