यूपी में रसोई गैस को लेकर प्रदेश सरकार की बड़ी तैयारी!: प्रत्येक जिले में 1,000 से ज्यादा बायोगैस प्लांट, गोबर से बनेगी गैस, वहीं LPG का खर्च...किसानों और युवाओं को मिलेंगे ये बड़े फायदें?
यूपी में रसोई गैस को लेकर प्रदेश सरकार की बड़ी तैयारी!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण ऊर्जा व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत प्रदेश में गो आधारित ग्रीन इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, हर जिले में 1,000 से अधिक मिनी बायोगैस प्लांट लगाए जाएंगे। इससे ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ ईंधन मिलेगा, किसानों की आय बढ़ाने में मदद होगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

गोबर से बनेगी रसोई गैस, गांव होंगे ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर, LPG खर्च होगा कम

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस योजना के तहत गांवों में फिक्स और पोर्टेबल दोनों प्रकार के मिनी बायोगैस प्लांट लगाए जाएंगे। इन प्लांटों में गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट से गैस तैयार होगी, जिसका उपयोग घरेलू रसोई गैस के रूप में किया जा सकेगा। इससे एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

हर जिले में बड़े स्तर पर चलेगा अभियान

गौरतलब है कि सरकार इस योजना को प्रदेशव्यापी अभियान के रूप में लागू करने की तैयारी कर रही है। प्रत्येक जिले में एक हजार से अधिक परिवारों तक बायोगैस प्लांट पहुंचाने की योजना बनाई गई है। ग्रामीणों को प्लांट लगाने के लिए अनुदान देने की रूपरेखा भी तैयार की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें।

IIT दिल्ली देगा तकनीकी सहयोग

विदित है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना में आईआईटी दिल्ली तकनीकी साझेदार की भूमिका निभाएगा। संस्थान प्लांट की डिजाइन, संचालन, रखरखाव और प्रशिक्षण से जुड़े कार्यों में सहयोग करेगा। इसके अलावा बायोगैस क्षेत्र में काम करने वाली 15 से अधिक निजी कंपनियों ने भी इस परियोजना में भागीदारी की इच्छा जताई है।

गोशालाएं बनेंगी 'रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब'

योजना के तहत प्रदेश की गोशालाओं को केवल पशु संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि 'रूरल रिसोर्स एंड एनर्जी हब' के रूप में विकसित करने की तैयारी है। यहां गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी, जैविक खाद और भविष्य में कार्बन क्रेडिट जैसे संसाधनों की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार

इस परियोजना के माध्यम से युवाओं को बायोगैस प्लांट की स्थापना, संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे गांवों में ग्रीन टेक्नीशियन तैयार होंगे। साथ ही स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।

किसानों को होगा दोहरा फायदा

बायोगैस प्लांट से निकलने वाली गैस का उपयोग रसोई ईंधन के रूप में किया जाएगा, जबकि प्लांट से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में खेतों में इस्तेमाल होगी। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही गोबर का आर्थिक उपयोग बढ़ने से किसानों को अतिरिक्त आय का भी अवसर मिलेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई ताकत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना बड़े स्तर पर लागू होती है, तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा, रोजगार और कृषि—तीनों क्षेत्रों को एक साथ मजबूती मिलेगी। सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को गो आधारित ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना और गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत मॉडल तैयार करना है।

अन्य खबरे