यूपी में नमो भारत का 7 नए रूटों पर विस्तार!: नोएडा-बुलंदशहर से लेकर हरिद्वार तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी, वहीं लखनऊ-कानपुर...जानिए किन नयें रूटों पर हैं विस्तार का नया प्रस्ताव
यूपी में नमो भारत का 7 नए रूटों पर विस्तार!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे के बाद अब रैपिड रेल यानी नमो भारत का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी है। योजना के तहत प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए कई नए कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। इन रूटों के विकसित होने से हापुड़, बुलंदशहर, खुर्जा, बागपत और आसपास के क्षेत्रों को हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने का रास्ता खुल सकता है। इसके अलावा गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट और गुरुग्राम-फरीदाबाद से नोएडा तक कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना भी शामिल है।

दिल्ली-मेरठ के बाद दूसरे जिलों की बारी

आपको बता दें कि दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर उत्तर प्रदेश का पहला क्षेत्रीय रैपिड रेल कॉरिडोर है। लगभग 82 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर सराय काले खां, न्यू अशोक नगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई, मुरादनगर, मोदीनगर और मेरठ के प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। इसी नेटवर्क पर मेरठ मेट्रो की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। अब इसी तरह दूसरे शहरों को जोड़ने के लिए नए रूटों पर काम करने की योजना है। इसका उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में रोजाना नौकरी, पढ़ाई और कारोबार के लिए आने-जाने वाले लोगों को तेज और सुविधाजनक परिवहन विकल्प देना है।

यूपी में इन 7 रूटों पर बन सकता है नमो भारत नेटवर्क

गौरतलब है कि प्रस्तावित योजनाओं में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर के अलावा गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट, गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा, दिल्ली-शाहदरा-बागपत-बड़ौत, गाजियाबाद-हापुड़, गाजियाबाद-बुलंदशहर-खुर्जा और दिल्ली-मेरठ से आगे हरिद्वार-ऋषिकेश की दिशा में कनेक्टिविटी बढ़ाने की संभावनाएं शामिल हैं। इनकी स्थिति अलग-अलग चरणों में है और सभी रूटों पर निर्माण शुरू होना अभी तय नहीं है।

जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने का नया विकल्प

गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक लगभग 72 किलोमीटर का कॉरिडोर प्रस्तावित है। इसके रूट में सिद्धार्थ विहार, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, चार मूर्ति चौक, अल्फा-1, परी चौक और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र शामिल किए जाने की योजना है। यह कॉरिडोर बनने पर गाजियाबाद और आसपास के शहरों से एयरपोर्ट तक पहुंच आसान हो सकती है। फिलहाल इस परियोजना के लिए आगे की मंजूरी और क्रियान्वयन की प्रक्रिया अहम होगी।

बागपत, हापुड़ और बुलंदशहर को मिलेगा फायदा

विदित है कि दिल्ली-शाहदरा-बागपत-बड़ौत कॉरिडोर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत, खेकड़ा और बड़ौत क्षेत्र को दिल्ली से जोड़ने की योजना है। वहीं, गाजियाबाद-हापुड़ कॉरिडोर से पिलखुवा और हापुड़ के औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है। गाजियाबाद-बुलंदशहर-खुर्जा कॉरिडोर प्रस्तावित होने पर बुलंदशहर और खुर्जा के यात्रियों को भी दिल्ली-एनसीआर की ओर आने-जाने के लिए तेज परिवहन विकल्प मिल सकता है। इससे नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

गुरुग्राम, फरीदाबाद और नोएडा के बीच भी कनेक्टिविटी

गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा कॉरिडोर की योजना दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख शहरों को क्षेत्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए बनाई गई है। लगभग 64 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित मार्ग में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के शहरी केंद्र शामिल होंगे। इससे एक शहर से दूसरे शहर तक रोजाना आने-जाने वाले लोगों को सुविधा मिल सकती है।

हरिद्वार-ऋषिकेश तक विस्तार की भी चर्चा

दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर को आगे मुजफ्फरनगर, रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश की दिशा में बढ़ाने की संभावना पर भी चर्चा है। यह योजना आगे बढ़ती है तो धार्मिक यात्रियों और पर्यटकों के लिए सड़क के अलावा तेज क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी का विकल्प विकसित हो सकता है। हालांकि, इसके लिए सर्वे, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और मंजूरी जैसे चरण महत्वपूर्ण होंगे।

भविष्य में लखनऊ, कानपुर और अयोध्या तक भी बढ़ सकता है नेटवर्क?

नमो भारत नेटवर्क के विस्तार को लेकर भविष्य में उत्तर प्रदेश के दूसरे बड़े शहरों को जोड़ने की संभावनाओं पर भी नजर है। लखनऊ, कानपुर और अयोध्या जैसे शहरों तक तेज क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना आगे बढ़ती है, तो राजधानी, औद्योगिक शहर और प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों के बीच सफर के नए विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, इन शहरों तक नमो भारत कॉरिडोर बनाने की कोई अंतिम स्वीकृति या तय समयसीमा फिलहाल स्पष्ट नहीं है। इसलिए अभी इन्हें भविष्य की संभावनाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

नमो भारत के नए कॉरिडोर उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के बीच यात्रा के तरीके को बदलने की क्षमता रखते हैं। लेकिन फिलहाल कई रूट प्रस्तावित हैं। उनके अंतिम स्टेशन, निर्माण की समयसीमा और संचालन की तारीखें संबंधित मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट होंगी।

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