यूपी में कैब सेवा होगी ओर मजबूत, सुरक्षा संबंधी नियमों में बड़ें बदलाव की तैयारी!: अब बिना पैनिक बटन नहीं चलेगी कोई भी टैक्सी, GPS-ट्रैकिंग अनिवार्य, वहीं पीक ऑवर में...पूरा मामला और बदलाव के मायने_एक नज़र
यूपी में कैब सेवा होगी ओर मजबूत, सुरक्षा संबंधी नियमों में बड़ें बदलाव की तैयारी!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में जल्द ही ऐप-आधारित टैक्सी सेवाओं का पूरा सिस्टम बदलने वाला है। सरकार पहली बार ओला-उबर जैसी कैब सेवाओं के लिए व्यापक नीति लागू करने की तैयारी में है। इसका मकसद साफ है कि यात्रियों की सुरक्षा, किराये की पारदर्शिता और ड्राइवरों के अधिकार तीनों को एक साथ सुनिश्चित करना। अभी तक कैब सेवाएं कंपनियों के नियमों से चलती थीं, लेकिन नई नीति लागू होते ही सरकारी नियमों के तहत चलेंगी।

हर टैक्सी में होगा सुरक्षा कवच; बटन दबाते ही पहुंचेगी मदद :

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि नई नीति का सबसे बड़ा बदलाव सुरक्षा को लेकर है। अब किसी भी कैब को सड़क पर चलने के लिए इन सुविधाओं से लैस होना जरूरी होगा:

●पैनिक बटन (आपात स्थिति में तुरंत अलर्ट)

●GPS लाइव ट्रैकिंग

●24×7 कंट्रोल रूम से कनेक्शन

●राइड की डिजिटल मॉनिटरिंग

यानी यात्री का सफर अब सिर्फ ड्राइवर पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि सिस्टम की निगरानी में होगा। खास तौर पर महिला यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

ड्राइवर बनना अब आसान नहीं; पहले जांच, फिर जॉब :

गौरतलब है कि नई नीति में ड्राइवरों पर भी सख्ती तय है। अब पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है। प्रशिक्षण और व्यवहारिक जांच होगी। पहचान और रिकॉर्ड सुरक्षित है। वाहन फिटनेस और बीमा जरूरी है। इससे फर्जी प्रोफाइल या संदिग्ध ड्राइवरों की एंट्री लगभग खत्म करने की कोशिश है।

Surge Pricing पर लगाम; पीक टाइम में मनमानी नहीं :

बारिश, रात या ऑफिस टाइम में कई गुना किराया बढ़ना आम शिकायत रही है। अब सरकार किराये पर भी कंट्रोल लाने जा रही है न्यूनतम और अधिकतम किराया तय किया जाएगा। पीक ऑवर में सीमित बढ़ोतरी होगी। कंपनियों की मनमानी खत्म होगी। यानी किराया की जगह जगह नियम तय करेंगे।

शिकायत करेंगे तो तुरंत सुनवाई भी :

विदित है कि अब यात्रियों को बार-बार मेल और हेल्पलाइन के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नई व्यवस्था में ऑनलाइन शिकायत पोर्टल, तय समय में समाधान और कंपनी की जवाबदेही तय होगी।

कंपनियों को भी लाइसेंस लेना होगा :

अब कोई भी ऐप-कैब कंपनी बिना रजिस्ट्रेशन यूपी में नहीं चल सकेगी।
सरकार स्पष्ट मानक तय करेगी। किराया ढांचा, सुरक्षा मानक, ड्राइवर योग्यता व बीमा और फिटनेस पर ध्यान दिया जाएगा।

आम जनता और ड्राइवर; दोनों को फायदा ;

यात्रियों के लिए:

●ज्यादा सुरक्षित सफर

●तय किराया

●ट्रैकिंग और कंट्रोल

ड्राइवरों के लिए:

●स्पष्ट नियम

●विवाद कम

●स्थिर कामकाज होगा।

क्या बदलेगा?

गौरतलब है कि अब कैब सिर्फ निजी सुविधा नहीं, बल्कि नियंत्रित सार्वजनिक परिवहन सेवा की तरह काम करेगी। सरकार का मानना है कि इससे शहरों में परिवहन व्यवस्था व्यवस्थित होगी और कैब विवादों में भारी कमी आएगी।

उत्तर प्रदेश सरकार की यह नीति सिर्फ ट्रांसपोर्ट नियम नहीं, बल्कि कैब सेक्टर की पूरी व्यवस्था बदलने वाली साबित हो सकती है। अब ऐप-कैब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि “नियमों के तहत सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन” बनने की ओर बढ़ रही है। आने वाले दिनों में यह पॉलिसी लागू होते ही यूपी में कैब यात्रा पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और नियंत्रित नजर आएगी

अन्य खबरे