लखनऊ : उत्तर प्रदेश में जमीन और मकान की खरीद-फरोख्त करने वालों के लिए योगी सरकार ने बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। अब रजिस्ट्री के दौरान 20 हजार रुपये से ज्यादा की फीस नकद नहीं, बल्कि सिर्फ ऑनलाइन ही जमा करनी होगी। इस फैसले से रजिस्ट्री दफ्तरों की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। प्रदेश सरकार का यह कदम डिजिटल यूपी, पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार पर लगाम की दिशा में अहम माना जा रहा है।
क्या है योगी सरकार का नया आदेश?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा द्वारा जारी आदेश के मुताबिक -
●₹20,000 से अधिक की रजिस्ट्री फीस ऑनलाइन देना अनिवार्य
●नकद लेन-देन पर लगाम
●रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ट्रेस योग्य होगी
●दलालों और अनधिकृत वसूली पर रोक
सरकार का साफ संदेश है कि अब जमीन-मकान की रजिस्ट्री डिजिटल, सुरक्षित और पारदर्शी होगी।
सोमवार से लागू, पहले चरण में इन जिलों में बदलाव :
गौरतलब है कि यह नई व्यवस्था सोमवार से लागू कर दी गई है। पहले चरण में उत्तर प्रदेश के 30 से ज्यादा जिलों में इसे शुरू किया गया है, जिनमें शामिल हैं—
आजमगढ़
बाराबंकी
रायबरेली
सुल्तानपुर
सीतापुर
हापुड़
मुजफ्फरनगर
अलीगढ़
बुलंदशहर
बरेली
अमरोहा
कानपुर नगर
फतेहपुर
देवरिया
चित्रकूट
बागपत
एटा
कासगंज
रामपुर
इटावा
हरदोई
बस्ती
अंबेडकरनगर
जौनपुर
कौशांबी
भदोही
महाराजगंज
बहराइच
मऊ
(अन्य जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा)
आम जनता को क्या होगा फायदा?
विदित है कि इस फैसले से आम नागरिकों को कई बड़े फायदे मिलेंगे—
●नकद लेन–देन से छुटकारा
●रजिस्ट्री दफ्तरों में भीड़ कम होगी
●समय और मेहनत की बचत
●रसीद और भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड
●भ्रष्टाचार और दलाली पर सीधा प्रहार
अब किसी को भी रजिस्ट्री के नाम पर अतिरिक्त रकम देने की मजबूरी नहीं होगी।
सरकार का मकसद क्या है?
आपको बता दें कि सरकार साफ कर चुकी है कि सरकार का मकसद रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल और सुरक्षित बनाना, कैश ट्रांजैक्शन खत्म करना, जमीन-मकान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाना और जनता को ईज ऑफ डूइंग प्रॉपर्टी देना है। महानिरीक्षक निबंधन ने सभी रजिस्ट्री कार्यालयों को सख्ती से आदेश पालन करने के निर्देश दिए हैं।
अगर नियम नहीं माना तो?
नए आदेश का उल्लंघन करने वाले कार्यालयों और कर्मचारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई भी हो सकती है।
यह फैसला साफ संकेत देता है कि योगी सरकार अब जमीन-मकान जैसे संवेदनशील सेक्टर में भी “कैश कल्चर” खत्म करने के मूड में है। यूपी में रजिस्ट्री सिस्टम अब पुराने ढर्रे की जगह डिजिटल भुगतान, पारदर्शिता और सख्ती के साथ चलेगा।