बॉलीवुड : बॉलीवुड के ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ कहे जाने वाले आमिर खान आज 61 साल के हो गए हैं। करीब चार दशक लंबे करियर में उन्होंने न सिर्फ कई सुपरहिट फिल्में दीं, बल्कि अभिनय और कहानी कहने के तरीके को भी नई दिशा दी। मात्र 8 साल की उम्र में फिल्म यादों की बारात से चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर कैमरे के सामने आने वाले आमिर खान ने आगे चलकर लगान , Ghajini, 3 इडियट्स और दंगल जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाई।
‘कयामत से कयामत तक’ से मिली स्टारडम
गौरतलब है कि हालांकि आमिर खान ने 1984 में फिल्म होली से बतौर अभिनेता शुरुआत की थी, लेकिन उन्हें असली पहचान 1988 में आई फिल्म कयामत से कयामत तक से मिली। इस फिल्म में उनके साथ जूही चावला नजर आई थीं। फिल्म की रोमांटिक कहानी और गानों ने दर्शकों के दिल जीत लिए। इस फिल्म की सफलता के बाद आमिर खान रातों-रात बॉलीवुड के उभरते सितारे बन गए और उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट डेब्यू एक्टर अवॉर्ड भी मिला।
फिल्म सेट ही बना पहला एक्टिंग स्कूल
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आमिर खान बचपन में अक्सर अपने पिता और परिवार के साथ फिल्म सेट पर जाया करते थे। वहां घंटों बैठकर शूटिंग देखते और कलाकारों को अभिनय करते हुए देखते रहते थे। यही अनुभव उनका पहला एक्टिंग स्कूल बन गया। आमिर खुद कहते हैं कि उन्होंने अभिनय किसी संस्थान से नहीं सीखा, बल्कि फिल्म सेट पर देखकर ही सीखा।
स्कूल के दिनों में स्टेट लेवल टेनिस खिलाड़ी
विदित है कि फिल्मों में आने से पहले आमिर खान की जिंदगी में खेल का भी बड़ा स्थान था। वे स्कूल के दिनों में स्टेट लेवल टेनिस खिलाड़ी रह चुके हैं। खेल से उन्हें अनुशासन और धैर्य की सीख मिली, जो बाद में उनके फिल्मी करियर में भी साफ दिखाई देती है।
क्यों कहा जाता है ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’
आपको बता दें कि आमिर खान अपने किरदार को परफेक्ट बनाने के लिए महीनों तैयारी करते हैं। वे स्क्रिप्ट पढ़ने से लेकर किरदार की मानसिकता समझने तक हर चीज पर गहराई से काम करते हैं। अगर उन्हें लगता है कि सीन सही नहीं हुआ है, तो वे कई बार रिहर्सल करने और दोबारा शॉट देने से भी पीछे नहीं हटते।
शूटिंग के दौरान घड़ी नहीं देखते
आमिर खान का मानना है कि फिल्म बनाना सिर्फ काम नहीं बल्कि जुनून है। यही वजह है कि शूटिंग के दौरान वे घड़ी देखने के बजाय सीन को बेहतर बनाने पर ध्यान देते हैं। उनके मुताबिक अगर पूरी टीम ईमानदारी से काम करे तो फिल्म का परिणाम भी शानदार होता है।
मोबाइल के दौर में भी पेजर इस्तेमाल
गौरतलब है कि जब मोबाइल फोन तेजी से लोकप्रिय हो रहे थे, उस समय भी आमिर खान लंबे समय तक पेजर इस्तेमाल करते रहे। उनका मानना था कि तकनीक से ज्यादा जरूरी अपने काम पर ध्यान देना है।
किरदार के लिए शरीर तक बदल देते हैं, करते परफेक्शन से कार्य
आपको बता दें कि आमिर खान अपने किरदार को असली बनाने के लिए शरीर तक बदलने से भी नहीं हिचकते। फिल्म Ghajini के लिए उन्होंने 8-पैक एब्स बनाए, वहीं दंगल के लिए पहले करीब 95 किलो वजन बढ़ाया और फिर कुछ ही महीनों में उसे कम कर एथलेटिक लुक हासिल किया।
‘लगान’ से बदली बॉलीवुड की दिशा
फिल्म लगान आमिर खान के करियर की सबसे ऐतिहासिक फिल्मों में गिनी जाती है। ग्रामीण पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म को ऑस्कर में भी नॉमिनेशन मिला था और इसने भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
आमिर आज भी खुद को सीखने वाला कलाकार मानते हैं।
इतनी सफलता और लोकप्रियता के बावजूद आमिर खान खुद को आज भी सीखने वाला कलाकार मानते हैं। उनका मानना है कि एक कलाकार को हमेशा सीखते रहना चाहिए। शायद यही वजह है कि करीब 40 साल के करियर के बाद भी आमिर खान लगातार नए प्रयोग करते रहते हैं और हिंदी सिनेमा के सबसे अलग सितारों में गिने जाते हैं।