58 के हुए कॉमेडी किंग अरशद वारसी!: छोटे से घर में गुजारी ज़िन्दगी, मुन्नाभाई के 'सर्किट' से मिली असली पहचान, वहीं जया बच्चन ने...जानें अरशद वारसी के 58 साल के संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी_एक नजर
58 के हुए कॉमेडी किंग अरशद वारसी!

मुंबई/मनोरंजन: हिंदी सिनेमा में जब भी बेहतरीन कॉमेडी की बात होती है, एक नाम अपने आप सामने आ जाता है; अरशद वारसी। ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ का सर्किट हो या ‘गोलमाल’ का माधव, ‘इश्किया’ का बब्बन हो या ‘असुर’ का धनंजय; अरशद वारसी ने हर किरदार में जान फूंक दी। आज वो 58 साल के हो गए हैं, लेकिन उनकी जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। आइए, जानते हैं अरशद वारसी के संघर्ष, दर्द और सफलता की कहानी…

मां-बाप से नहीं मिला लगाव, छुट्टियों में अकेले रह जाते थे

आपको बता दें कि अरशद वारसी का जन्म 19 अप्रैल 1968 को मुंबई में हुआ। उन्होंने बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई की, जहां माता-पिता से मिलन साल में सिर्फ दो बार होता था। अक्सर उनके माता-पिता उनकी छुट्टियां भूल जाते थे, जिससे वह स्कूल में अकेले रह जाते थे, जबकि बाकी सभी बच्चे घर चले जाते थे। अरशद ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि वह इतना अकेला महसूस करते थे कि खुद को चिट्ठियां लिखते थे और अपने दोस्तों से डाक से पोस्ट करवाते थे।

मां के डायलिसिस में उड़ जाती थी सारी कमाई

गौरतलब है कि अरशद के पिता बिजनेसमैन थे, लेकिन उन्होंने सारा पैसा बिजनेस में डुबा दिया। वह बोन कैंसर से जूझ रहे थे, जबकि मां किडनी की बीमारी से ग्रसित थीं। हर हफ्ते मां का डायलिसिस होता था। अरशद उस समय कोरियोग्राफर थे। उन्होंने बताया कि “मेरी सारी कमाई मां के एक हफ्ते के डायलिसिस पर खर्च हो जाती थी। हर हफ्ते यही प्रक्रिया दोबारा होनी थी। उस वक्त लगा कि जिंदगी क्या है, एक छोटे से घर में गुजारा करना।” माता-पिता के निधन के बाद अरशद पूरी तरह अकेले रह गए। उनके पास न कोई था, न ही कोई सहारा। इसी अकेलेपन ने उन्हें मजबूत बनाया।

जया बच्चन ने दिलाई फिल्मों में एंट्री, पहली फिल्म थी ‘तेरे मेरे सपने’

अरशद वारसी ने कभी एक्टर बनने का सपना नहीं देखा था। वह कोरियोग्राफर थे। लेकिन जया बच्चन ने उन्हें फिल्मों में लाने की पहल की। उनकी पहली फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ थी, जो अमिताभ बच्चन की कंपनी ABCL के बैनर तले बनी। इसके बाद उन्होंने ‘बेताबी’, ‘मेरे दो अनमोल रत्न’ और ‘हीरो हिंदुस्तानी’ जैसी फिल्मों में काम किया, लेकिन असली पहचान मिली ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ के ‘सर्किट’ किरदार से।

सास-ससुर को नहीं थी शादी की मंजूरी

विदित है कि अरशद वारसी ने 1999 में एंकर मारिया गोरेटी से शादी की। यह प्रेम कहानी जेवियर कॉलेज में एक डांस प्रतियोगिता के दौरान शुरू हुई। लेकिन शादी के लिए उनके सास-ससुर तैयार नहीं थे। बाद में उनकी सोच बदली और दोनों ने शादी कर ली। आज उनके दो बच्चे हैं; बेटा जीक और बेटी जेने।

‘सर्किट’ बना टर्निंग पॉइंट; बदल गई जिंदगी

गौरतलब है कि साल 2003 में Munna Bhai M.B.B.S. फ़िल्म आयी, और “सर्किट” का किरदार अमर हो गया। डायलॉग, स्टाइल, दोस्ती; सब कुछ लोगों के दिल में बस गया। इसके बाद अरशद वारसी सिर्फ एक एक्टर नहीं कॉमेडी के ‘किंग’ बन गए।

कॉमेडी से लेकर सीरियस रोल तक; हर जगह छाए

अरशद ने साबित किया कि वो सिर्फ हंसाते नहीं दिल भी जीतते हैं

  • गोलमाल – माधव का गुस्सैल कॉमेडी अवतार
  • जॉली LLB – चालाक लेकिन दिलदार वकील
  • इश्किया – ग्रे शेड वाला किरदार
  • असुर – सीरियस और थ्रिलिंग रोल

यानी अरशद हर रोल में फिट, हर अंदाज में हिट रहें हैं।

टीवी में भी कमाया नाम

आपको बता दें कि अरशद ने फिल्मों के अलावा टीवी पर भी काम किया। उन्होंने ‘राजमाताज’ शो होस्ट किया, करिश्मा कपूर के अपोजिट ‘करिश्मा: द मिरेकल ऑफ डेस्टिनी’ में काम किया और बिग बॉस के पहले सीजन (2006) को भी होस्ट किया।

जिस लड़के को माता-पिता छुट्टियों तक में याद नहीं करते थे, जो खुद को चिट्ठियां लिखता था, जिसकी सारी कमाई मां के इलाज में उड़ जाती थी, आज वही अरशद वारसी बॉलीवुड के कॉमेडी किंग हैं। ‘सर्किट’ से ‘आदि’ तक, ‘जॉली’ से ‘धनंजय’ तक; उन्होंने हर किरदार को अमर कर दिया। 58 साल की उम्र में वह आज भी उतने ही एनर्जेटिक हैं, जितने ‘मुन्ना भाई’ के सर्किट थे। यही उनकी असली कामयाबी है।

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