जेवर एयरपोर्ट को लेकर योगी सरकार का बड़ा ऐलान!: अब ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ के नाम से होगी इसकी नई पहचान, वहीं जेवर विधायक नें...जानिए क्या हैं इस एयरपोर्ट की बड़ी खासियतें
जेवर एयरपोर्ट को लेकर योगी सरकार का बड़ा ऐलान!

नोएडा : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जेवर एयरपोर्ट को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। मुख्यमंत्री ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी। इस फैसले के बाद जेवर एयरपोर्ट एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आइए जानते हैं कि सरकार ने यह निर्णय क्यों लिया और इस एयरपोर्ट की क्या हैं खासियतें।

कैबिनेट बैठक में लगी नाम बदलने के प्रस्ताव पर मुहर

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें कई प्रस्तावों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने जेवर एयरपोर्ट के नाम को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। सरकार के इस फैसले से जेवर एयरपोर्ट की पहचान को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, नाम बदलने के फैसले के औपचारिक क्रियान्वयन और संबंधित प्रक्रियाओं की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।

PM मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन का भी किया जिक्र

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे होने पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा जनसेवा, जनकल्याण और जनभागीदारी की मिसाल है। सीएम योगी के मुताबिक, केंद्र और प्रदेश सरकार के साझा प्रयासों से उत्तर प्रदेश में आधुनिक बुनियादी ढांचे, बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में काम हुआ है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश नए आत्मविश्वास के साथ विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

जेवर एयरपोर्ट की क्या हैं बड़ी खासियतें?

ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते हवाई यातायात की जरूरतों को पूरा करना और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्रियों का दबाव कम करने में मदद करना है। परियोजना की शुरुआती क्षमता लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों सालाना संभालने की बताई गई है। भविष्य में चरणबद्ध विस्तार के जरिए इसकी क्षमता बढ़ाने की योजना है।

मेट्रो, बस और हाई-स्पीड रेल से कनेक्टिविटी की योजना

एयरपोर्ट को बेहतर परिवहन सुविधाओं से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके लिए बस, टैक्सी और निजी वाहनों की पार्किंग जैसी सुविधाओं के साथ मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी विकसित करने पर जोर है। प्रस्तावित मेट्रो और हाई-स्पीड रेल संपर्क से भी यात्रियों को भविष्य में लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होने पर दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान हो सकता है। इससे आसपास के क्षेत्रों में कारोबार, रोजगार और निवेश की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

जेवर विधायक ने जताया आभार

विदित है कि जेवर एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास के लिए भी अहम माना जा रहा है। एयरपोर्ट के आसपास होटल, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने एयरपोर्ट का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने के फैसले के लिए मुख्यमंत्री और कैबिनेट का आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ही परियोजना का भूमि पूजन किया था।

अब आगे क्या होगा?

कैबिनेट की मंजूरी के बाद नाम परिवर्तन से जुड़ी अगली औपचारिक प्रक्रियाओं पर नजर रहेगी। एयरपोर्ट की वास्तविक उपयोगिता और क्षेत्र को मिलने वाला लाभ इसकी परिचालन व्यवस्था, परिवहन संपर्क और विकास कार्यों की प्रगति पर निर्भर करेगा।

जेवर एयरपोर्ट का नाम ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखने का फैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति और बुनियादी ढांचे से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घोषणा है। अब देखना होगा कि यह परियोजना कब पूरी तरह परिचालन में आती है और दिल्ली-एनसीआर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को इससे कितना लाभ मिलता है।

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